हरियाणा में श्रद्धा, संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बना सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
चंडीगढ़: हरियाणा प्रदेश में रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। राज्य के सभी जिलों और उपमंडलों में स्थित मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया, ओम मंत्र का उच्चारण कर वातावरण को भक्तिमय बनाया और भगवान सोमनाथ की महिमा का गुणगान किया। पूरे प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष धूम देखने को मिली।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रातःकाल कलश यात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, शिव वंदना और धार्मिक कथाओं के माध्यम से भगवान सोमनाथ की महिमा का वर्णन किया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और हवन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में सोमनाथ मंदिर के इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर आधारित विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई गईं। इन प्रदर्शनों में सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व, उसके पुनर्निर्माण और भारतीय सभ्यता की अदम्य शक्ति को दर्शाया गया। लाखों लोगों ने इन प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और भारत की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के संबोधनों का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया, जिसे लोगों ने बड़े उत्साह से देखा। श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा ऐतिहासिक अवसर बताया।
करनाल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष Harvinder Kalyan ने कहा कि देश ने लंबे समय तक गुलामी का दौर देखा, जिसमें भारत की संस्कृति और गौरव को गहरी चोट पहुंचाई गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है और आत्मसम्मान के साथ विश्व में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना अब तेजी से साकार होता दिखाई दे रहा है।
also read : सहकारिता क्षेत्र को नई ताकत देने में जुटी केंद्र सरकार, अमित शाह से मिले हरियाणा के मंत्री डॉ अरविंद शर्मा
अंबाला में आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री Anil Vij ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को सर्वोच्च सम्मान देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों को नई पहचान देकर देश की आस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व देश को एकता और संस्कृति के सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है।
खेल राज्य मंत्री Gaurav Gautam ने कहा कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखता है और यह मंदिर भारतीय आस्था, साहस और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shyam Singh Rana ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की अजेय सभ्यता और अटूट आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व श्रद्धा, उत्साह और भक्ति से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों और भजन मंडलियों द्वारा शिव तांडव, शिव वंदना और भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा।
सिरसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री Ranbir Singh Gangwa ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की आत्मा, एकता और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय समाज की अटूट आस्था और साहस को दर्शाता है।
भिवानी में महिला एवं बाल विकास तथा सिंचाई मंत्री Shruti Choudhry ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की प्राचीन संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास और परंपराओं के प्रति जागरूक बनाते हैं।
प्रदेशभर में आयोजित इस पर्व के दौरान मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। कई स्थानों पर दीप सज्जा, भजन संध्या और धार्मिक झांकियों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने परिवार सहित मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और देश की सुख-समृद्धि तथा शांति के लिए प्रार्थना की।
धार्मिक विद्वानों ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारतीय संस्कृति की अमर चेतना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और संघर्षशील आत्मा का जीवंत प्रतीक भी है। इतिहास में अनेक आक्रमणों और विनाश के बावजूद मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण भारत की अटूट शक्ति और विश्वास को दर्शाता है।
प्रदेशभर में हुए कार्यक्रमों में युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को मजबूत करने वाला पर्व बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, भाईचारा और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देते हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से हरियाणा में भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया।
