संजय सिंह का पीएम मोदी पर हमला, चुनाव खत्म होते ही जनता पर बोझ बढ़ने का आरोप, महंगाई को लेकर सियासत तेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से की गई आर्थिक बचत संबंधी अपील के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सोना खरीदने में कटौती करने, विदेश यात्राएं कम करने और पेट्रोल-डीजल की खपत को नियंत्रित करने की सलाह दी थी।
इस बयान पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का रवैया चुनावों के बाद बदल जाता है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया जाता है।
“चुनाव खत्म, जनता का इस्तेमाल खत्म” – संजय सिंह
संजय सिंह ने कहा कि हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के चुनावों के बाद सरकार का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “चुनाव खत्म होते ही जनता का इस्तेमाल खत्म” हो जाता है और उसके बाद महंगाई का बोझ बढ़ा दिया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि चुनावी समय में सरकार यह संदेश देती रही कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही स्थिति बदल गई। उनके अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 993 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि घरेलू रसोई गैस की कीमतों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
जनता पर बढ़ते आर्थिक दबाव का आरोप
संजय सिंह ने कहा कि अब जनता से देशभक्ति के नाम पर ईंधन और गैस की खपत कम करने और सोना खरीदने से बचने की अपील की जा रही है। उन्होंने इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार जनता से बचत और संयम की अपील करती है, जबकि दूसरी ओर महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। इससे आम परिवारों का बजट बिगड़ रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें महंगी होती जा रही हैं।
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राजनीतिक रैलियों और विदेश यात्राओं पर सवाल
संजय सिंह ने सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक ओर जनता से खर्च कम करने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक रैलियों में भारी संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि एक तरफ जनता से बचत की अपील की जाती है, जबकि दूसरी तरफ उच्च स्तर पर विदेश दौरों का सिलसिला जारी रहता है।
सियासी घमासान तेज
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर जनता से दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि यह अपील आर्थिक अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ऐसी अपीलें समय-समय पर सामने आती हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रिया इसे और अधिक संवेदनशील बना देती है।
जनता में बढ़ी चर्चा
प्रधानमंत्री की अपील और उस पर विपक्षी प्रतिक्रिया अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे आर्थिक सावधानी का संदेश मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे बढ़ती महंगाई की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रहने की संभावना है।

