महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर विद्यार्थियों ने रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट सिंचाई और तकनीकी नवाचार से जुड़े आधुनिक मॉडल प्रस्तुत किए।
Maharshi Dayanand University के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आधुनिक विज्ञान, शोध और तकनीकी नवाचार से जुड़े अत्याधुनिक मॉडल प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। समारोह में विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शोध, नवाचार और आधुनिक तकनीक की ओर प्रेरित करना था ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का समाधान विकसित कर सकें। समारोह के दौरान आयोजित विज्ञान एवं इंजीनियरिंग परियोजना प्रदर्शनी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, जिसमें विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, रोबोटिक्स, स्मार्ट सिंचाई, अपशिष्ट प्रबंधन और विद्युत सुरक्षा जैसे विषयों पर आधारित कई अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए।
विश्वविद्यालय के कुलपति Milap Punia ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहे बल्कि तकनीक और शोध के क्षेत्र में दक्ष बनकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के युवा वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान क्षमता और तकनीकी नवाचार को अपनाएंगे।
कुलपति ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और तकनीकी कौशल की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा देना नहीं बल्कि उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और अनुसंधान आधारित शिक्षा से भी जोड़ना है। उन्होंने शिक्षकों से भी आह्वान किया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया जाए ताकि वे भी आधुनिक तकनीक और शोध के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकें।
समारोह में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार Sandeep Bansal विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस युवाओं को विज्ञान, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मॉडल आधुनिक तकनीकी सोच और सामाजिक समस्याओं के समाधान का उत्कृष्ट उदाहरण बने। नवीकरणीय ऊर्जा आधारित परियोजनाओं में सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली उत्पादन और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। वहीं स्मार्ट सिंचाई प्रणाली से जुड़े मॉडलों में जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उपायों को प्रदर्शित किया गया।
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रोबोटिक्स और स्वचालित तकनीकों से जुड़े मॉडलों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने ऐसे मॉडल प्रस्तुत किए जो भविष्य में उद्योग, कृषि और सुरक्षा क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकते हैं। कई परियोजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों और स्वचालित नियंत्रण प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया।
इंजीनियरिंग परियोजना प्रतियोगिता में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों विशाल, हिमांशु, रुद्र, आकाश, हर्ष और नितिन की टीम ने “एयर प्यूरीफायर निर्माण एवं विश्लेषण” परियोजना के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस परियोजना का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करना था।
इसके अलावा हर्ष, आकाश और आशीष की टीम ने उच्च प्रदर्शन पॉलीमर आधारित त्रि-आयामी प्रिंटर परियोजना के लिए पहला स्थान हासिल किया। विशेषज्ञों ने इस परियोजना को आधुनिक विनिर्माण तकनीक के क्षेत्र में उपयोगी और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र हार्दिक सिन्हा ने “स्वचालित लेजर कटिंग एवं निगरानी प्रणाली” परियोजना के लिए द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक के माध्यम से औद्योगिक कार्यों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया था।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के आर्यन, हिमांशु, निशांत, शुभम, मुकेश, भविष्य और प्रियंका की टीम ने “वायरलेस नियंत्रित हाइड्रोलिक जैक” परियोजना के लिए द्वितीय स्थान हासिल किया। इस परियोजना को औद्योगिक और वाहन मरम्मत कार्यों में उपयोगी माना गया।
तृतीय स्थान सिद्धार्थ, अमन, राहुल राज, केशव, हर्ष, गौरव और साहिल की टीम को “सौर ऊर्जा आधारित बहुउद्देश्यीय कृषि वाहन” परियोजना के लिए प्रदान किया गया। इस मॉडल में आधुनिक कृषि तकनीक और ऊर्जा संरक्षण को जोड़ने का प्रयास किया गया था।
इसके अलावा यश, रोहित, गौरव, दिवेश, परीक्षित और अनुभव की टीम ने नारियल के खोल आधारित जल शोधन प्रणाली परियोजना के लिए तृतीय स्थान प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने इस परियोजना को जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बचाव कुर्सी परियोजना को प्रथम, अग्निशमन परीक्षण प्रणाली को द्वितीय तथा ड्रोन आधारित परियोजना को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि आज दुनिया तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रहकर शोध, नवाचार और व्यावहारिक तकनीक की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता को मजबूत करते हैं। इससे युवा नई तकनीकों के प्रति जागरूक होते हैं और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित होते हैं।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बना। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया गया।

