पिहोवा में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की सनातन चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए युवाओं से सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के संघर्ष, आक्रमणों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण इस बात का प्रमाण है कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक चेतना को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री सोमवार को कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में आयोजित राज्य स्तरीय ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और युवा उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व देशवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और सनातन संस्कृति के गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज का भारत विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक धरोहरों को विश्व स्तर पर नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, महाकाल लोक, केदारनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार ने देश की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों तक उपेक्षित रही भारत की आध्यात्मिक विरासत को अब सम्मान मिल रहा है और देश अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास केवल मंदिर निर्माण का इतिहास नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था और अदम्य साहस की कहानी है। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने कई बार मंदिर को नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार यह मंदिर और अधिक भव्यता और विश्वास के साथ पुनः खड़ा हुआ। यही भारत की आत्मा है, जिसे कोई भी शक्ति समाप्त नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लेकर राष्ट्रीय स्वाभिमान को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मई 1951 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा पुनर्निर्मित मंदिर का उद्घाटन किया जाना भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय था।
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मुख्यमंत्री ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का देश नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता और जीवन दर्शन है। यदि युवा अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को समझेंगे तो वे राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
उन्होंने समाज और अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और इतिहास के प्रति जागरूक बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता और विज्ञान के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि 8 जून को हरियाणा से सोमनाथ के लिए विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 48 कोस कुरुक्षेत्र क्षेत्र में स्थित अनेक प्राचीन तीर्थ स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल कर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित ज्योतिसर अनुभव केंद्र आधुनिक तकनीक के माध्यम से महाभारत और गीता के संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहा है। इससे युवाओं और पर्यटकों को भारतीय संस्कृति और इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर अनेक बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार श्रद्धा और विश्वास के बल पर उसका पुनर्निर्माण हुआ। यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को जाने और अपनी संस्कृति पर गर्व करे। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, आस्था और पुनर्जागरण की प्रेरणा भी देता है।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” और “जय सोमनाथ” के जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मुख्यमंत्री ने संत समाज का सम्मान करते हुए कहा कि संतों और आध्यात्मिक संस्थाओं ने सदैव समाज को सही दिशा देने का कार्य किया है।
कार्यक्रम में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज, संत बंसीपुरी महाराज, पंडित सतपाल महाराज, मंदिर समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

