हरियाणा सरकार ने आपदाओं से निपटने के लिए राज्यव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करते हुए सभी जिलों और विभागों में व्यापक तैयारी अभियान शुरू किया है।
हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्यभर में आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों और जिलों में समन्वित आपदा तैयारी अभियान शुरू करते हुए एक व्यापक राज्यव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचा लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस पहल को प्रशासनिक सुधार और आधुनिक आपदा प्रबंधन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तीय आयुक्त Sumita Mishra ने ‘इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ के तहत हरियाणा राज्य आपदा प्रतिक्रिया नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य राज्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति के दौरान तेज, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत गठित ‘इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ को हरियाणा में पहले ही राज्य और जिला स्तर पर अधिसूचित किया जा चुका है। यह प्रणाली आपदा के समय कमान, संसाधन प्रबंधन, विभागीय तालमेल और राहत कार्यों के संचालन के लिए एक स्पष्ट और संरचित व्यवस्था प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि इस ढांचे के अंतर्गत प्रत्येक विभाग और अधिकारी की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं ताकि बाढ़, लू, औद्योगिक दुर्घटनाओं, आगजनी और अन्य आपात परिस्थितियों के दौरान सभी विभाग एकजुट होकर तेजी से कार्य कर सकें। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि हरियाणा राज्य आपदा प्रतिक्रिया नियमावली को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से हरियाणा को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
also read : बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी रीमॉडलिंग में तेजी, 15 जून तक आरसीसी पाइपलाइन कार्य पूरा करने के निर्देश
राज्य स्तर पर 24 प्रमुख विभागों के प्रशासनिक सचिवों को ‘इंसीडेंट कमांडर’ की भूमिका में जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें गृह, पर्यावरण एवं वन, परिवहन, नागरिक उड्डयन, वित्त, पुलिस, सिंचाई, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और अग्निशमन सेवा जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। डॉ. सुमिता मिश्रा ने इन सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि नामित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह परिचित हों और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सक्रिय हो सकें।
इसके साथ ही हरियाणा के सभी 23 जिलों के उपायुक्तों को भी पत्र जारी कर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, अभ्यास सत्र और मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता, राहत केंद्रों की तैयारी और आपातकालीन सेवाओं के समन्वय को मजबूत करने के लिए कहा गया है।
हरियाणा सरकार 14 मई 2026 को राज्य के 13 बाढ़ संभावित जिलों में बड़े स्तर पर बाढ़ आपदा मॉक अभ्यास आयोजित करने जा रही है। इनमें गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर शामिल हैं। इस अभ्यास के माध्यम से विभिन्न विभागों और एजेंसियों की तैयारी, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि 6 मई को ओरिएंटेशन और समन्वय सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद 12 मई को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न आपदा परिदृश्यों, संभावित चुनौतियों और राहत रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। इस अभ्यास का उद्देश्य अधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों के लिए मानसिक और प्रशासनिक रूप से तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के दौर में इस प्रकार की तैयारी अत्यंत आवश्यक हो गई है। हरियाणा सरकार द्वारा अपनाया गया यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार यदि सभी विभाग एकीकृत ढांचे के तहत कार्य करें तो आपदा के समय जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राज्य सरकार का यह प्रयास राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आपदाओं के बाद राहत पहुंचाना नहीं बल्कि पहले से तैयारी कर नुकसान को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण और आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली के जरिए हरियाणा को अधिक सुरक्षित और सक्षम राज्य बनाया जा रहा है।
राज्य सरकार की इस पहल को प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों द्वारा सराहा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे आपातकालीन परिस्थितियों में विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

