महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के उनके योगदान को याद करते हुए समतामूलक समाज निर्माण का संकल्प दोहराया गया।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर बिरला ऑडिटोरियम में सैनी समाज द्वारा आयोजित सम्मान एवं कृतज्ञता समारोह में सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय के मूल्यों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में महात्मा फुले के जीवन संघर्ष, समाज सुधार के प्रयासों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों को याद किया गया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हुए पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन मानवता, सामाजिक चेतना और समानता के मूल्यों को समर्पित रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
शिक्षा और सामाजिक चेतना के प्रतीक थे महात्मा फुले
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने उस समय समाज सुधार की शुरुआत की जब शिक्षा और समान अधिकार केवल सीमित वर्ग तक ही पहुंचते थे। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, दलितों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक पहल की। उनकी सोच आज भी समाज को नई दिशा देने का काम कर रही है।
समारोह में यह भी कहा गया कि महात्मा फुले का संघर्ष केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया। यही कारण है कि आज भी उन्हें सामाजिक क्रांति के महानायक के रूप में याद किया जाता है।
also read : सीकर के जाजोद गांव में सुबह की सैर के दौरान ग्रामीण संस्कृति से भावुक हुए मुख्यमंत्री, गांवों के समग्र विकास को बताया सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
समतामूलक समाज निर्माण पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में कहा गया कि वर्तमान समय में समाज को शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को और मजबूत करने की जरूरत है। सरकार का लक्ष्य ऐसा समाज तैयार करना है जहां हर व्यक्ति को सम्मान, अवसर और विकास का समान अधिकार मिले।
इस दौरान यह भी कहा गया कि गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा और कौशल विकास सबसे प्रभावी माध्यम हैं। समाज में जागरूकता और समानता का वातावरण तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
समाज के विभिन्न वर्गों ने लिया भाग
बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी देखने को मिली। युवाओं ने महात्मा फुले के विचारों को आधुनिक समय में भी प्रासंगिक बताते हुए शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
महिलाओं ने कहा कि महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा महिला शिक्षा के लिए किए गए कार्यों ने देश में सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रखी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश
कार्यक्रम में युवाओं से आह्वान किया गया कि वे महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन से प्रेरणा लें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकती है।
सामाजिक जानकारों का मानना है कि महात्मा फुले के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय के लिए उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करता रहेगा।
सामाजिक समरसता और विकास का संदेश
कार्यक्रम के अंत में समाज में भाईचारा, समानता और जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले के आदर्शों पर चलकर ही एक मजबूत, समतामूलक और विकसित समाज का निर्माण संभव है।
इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक प्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। समारोह में महात्मा फुले के योगदान को याद करते हुए उन्हें समाज सुधार का महान प्रेरणास्रोत बताया गया।

