प्रधानमंत्री मोदी ने 20 राज्य और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ बैठक कर कामकाज की समीक्षा की। फेरबदल की अटकलों के बीच बिना IAS अफसरों के हुई मीटिंग चर्चा में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्र सरकार के करीब 20 राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अहम समीक्षा बैठक की। खास बात यह रही कि इस बैठक में न तो कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे और न ही वरिष्ठ नौकरशाहों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से सीधे बातचीत कर उनके मंत्रालयों के कामकाज और सरकारी योजनाओं की प्रगति का फीडबैक लिया।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र में संभावित मंत्रिपरिषद फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा चल रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस बैठक को मंत्रिमंडल में किसी बदलाव से जोड़कर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य मंत्रियों से लिया कामकाज का अपडेट
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े लगभग 20 मंत्री शामिल हुए।
मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों में किए गए काम, नई योजनाओं और नीतिगत पहलों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। इसके अलावा योजनाओं के जमीन पर क्रियान्वयन, सामने आ रही चुनौतियों और आने वाले समय की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई। इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य मंत्रालयों के कामकाज की वास्तविक स्थिति को सीधे मंत्रियों से समझना माना जा रहा है।
बैठक में किसी IAS अधिकारी की मौजूदगी नहीं
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक अपने प्रारूप को लेकर भी खास रही। आमतौर पर कैबिनेट स्तर की महत्वपूर्ण बैठकों में संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और सचिव भी मौजूद रहते हैं।
लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने बिना किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी या मंत्रालय के सचिव की मौजूदगी के राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों से सीधे बातचीत की। इससे प्रधानमंत्री को मंत्रालयों से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की स्थिति के बारे में मंत्रियों का सीधा फीडबैक लेने का मौका मिला।
कैबिनेट की नियमित बैठक से क्यों अलग थी यह मीटिंग?
यह बैठक प्रधानमंत्री की सामान्य कैबिनेट मीटिंग या मंत्रिपरिषद की व्यापक समीक्षा बैठकों से अलग रही। कैबिनेट बैठकों में आमतौर पर प्रधानमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होते हैं। वहीं इस बैठक में फोकस केवल राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के कामकाज पर रखा गया।
इस तरह के प्रारूप से प्रधानमंत्री को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्रियों से बिना किसी मध्यस्थ के सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है।
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क्या बाकी मंत्रियों के साथ भी होगी ऐसी बैठक?
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों के साथ भी इसी तरह अलग-अलग समूहों में बैठकें हो सकती हैं।
अगर ऐसा होता है तो इसे केंद्र सरकार के कामकाज की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा सकता है। अलग-अलग बैच में मंत्रियों से बातचीत के जरिए प्रधानमंत्री मंत्रालयों की प्रगति, योजनाओं की स्थिति और भविष्य की प्राथमिकताओं का जायजा ले सकते हैं।
मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं इसलिए भी तेज हैं क्योंकि लंबे समय से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी तक इस बैठक को संभावित फेरबदल से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है। इसलिए इसे सीधे मंत्रिमंडल विस्तार या बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
फिर भी, मंत्रियों के प्रदर्शन का प्रधानमंत्री द्वारा सीधे आकलन किए जाने के कारण राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पूरी कवायद पर बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी का नया फॉर्मेट क्यों है महत्वपूर्ण?
इस बैठक का सबसे अहम पहलू इसका अलग फॉर्मेट रहा। प्रधानमंत्री ने संबंधित कैबिनेट सहयोगियों या वरिष्ठ नौकरशाहों की मौजूदगी के बिना राज्य मंत्रियों से सीधे बातचीत की।
इससे उन्हें उन मंत्रियों से सीधे जानकारी लेने का अवसर मिला, जिन्हें विशेष योजनाओं, विषयों या विभागीय जिम्मेदारियों की निगरानी सौंपी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी राज्य मंत्रियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुसार अधिक सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में यह बैठक सरकार के कामकाज की निगरानी और मंत्रियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

