पैसिव स्मोकिंग क्या है और इससे धूम्रपान न करने वालों को कितना खतरा है? जानें सेकंडहैंड स्मोकिंग के स्वास्थ्य पर असर, जोखिम और बचाव के आसान उपाय।
पैसिव स्मोकिंग: क्या आप धूम्रपान नहीं करते, फिर भी सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहते हैं? अगर हां, तो यह आपकी सेहत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान से निकलने वाले धुएं को सांस के जरिए अंदर लेना पैसिव स्मोकिंग या सेकंडहैंड स्मोकिंग कहलाता है।
धूम्रपान का असर सिर्फ सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। आसपास मौजूद लोग भी तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आ सकते हैं। खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और हृदय या सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों के लिए इससे बचना बेहद जरूरी है।
क्या होती है पैसिव स्मोकिंग?
जब कोई व्यक्ति खुद सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करता, लेकिन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद होकर उसके धुएं को सांस के साथ अंदर लेता है, तो इसे पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।
सिगरेट जलने और उसके सेवन के दौरान वातावरण में कई तरह के हानिकारक रसायन फैलते हैं। बंद कमरे, कार या कम वेंटिलेशन वाली जगह पर इनका संपर्क अधिक हो सकता है। यही वजह है कि केवल खुद धूम्रपान से दूर रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास के वातावरण को भी धूम्रपान-मुक्त रखना जरूरी है।
पैसिव स्मोकिंग से किसे ज्यादा खतरा?
सेकंडहैंड स्मोकिंग किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ लोग इसके प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
बच्चे: धुएं के संपर्क में आने से बच्चों में खांसी, सांस से जुड़ी परेशानी और श्वसन संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं से बचना जरूरी है, क्योंकि इसका असर मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
हृदय रोगी: पहले से हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए तंबाकू के धुएं का संपर्क अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है।
सांस के मरीज: अस्थमा या अन्य श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों में धुएं के कारण लक्षण बढ़ सकते हैं।
also read: गट हेल्थ बेहतर रखने के लिए नाश्ते में खाएं ये 5 चीजें, पाचन को मिलेगा सपोर्ट
पैसिव स्मोकिंग से क्या स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
कम समय के लिए भी धुएं के संपर्क में आने पर कुछ लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।
वहीं लंबे समय तक सेकंडहैंड स्मोक के संपर्क को हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है। बच्चों में भी लगातार धुएं के संपर्क से श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
भारत में भी चिंता का विषय है सेकंडहैंड स्मोक
भारत में तंबाकू का सेवन लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती रहा है। इसका प्रभाव केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर नहीं पड़ता, बल्कि परिवार और आसपास के लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।
विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों में सेकंडहैंड स्मोकिंग से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को लेकर चिंता जताई गई है। इसलिए घर और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू के धुएं के संपर्क को कम करना जरूरी है।
घर को बनाएं धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र
पैसिव स्मोकिंग से बचने के लिए घर को धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र बनाना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। घर के अंदर या बच्चों के आसपास किसी को भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
अगर परिवार में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो उसे घर और वाहन के अंदर धूम्रपान न करने के लिए प्रेरित करें। सार्वजनिक स्थानों पर भी धूम्रपान करने वाले लोगों से उचित दूरी बनाए रखना बेहतर है।
बच्चों का रखें विशेष ध्यान
बच्चों को तंबाकू के धुएं से बचाना बेहद जरूरी है। घर, कार या किसी बंद स्थान में धूम्रपान करने से बचें। परिवार के सदस्यों को भी बच्चों के सामने धूम्रपान न करने के लिए जागरूक करें।
धूम्रपान छोड़ना न केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों को सेकंडहैंड स्मोक से बचाने में भी मदद करता है।
पैसिव स्मोकिंग से बचने के आसान उपाय
- घर और कार को पूरी तरह धूम्रपान-मुक्त रखें।
- बच्चों के आसपास धूम्रपान न होने दें।
- धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें।
- बंद कमरे में धूम्रपान करने से बचें।
- परिवार और दोस्तों को सेकंडहैंड स्मोक के नुकसान के बारे में जागरूक करें।
- अगर धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ने के लिए चिकित्सकीय सहायता लें।

