निर्मला सीतारमण और अजय बंगा की मुलाकात में भारत-विश्व बैंक साझेदारी, बॉन्ड बाजार, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर और निजी निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की। यह बैठक एशविले में आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की बैठक के दौरान हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत और विश्व बैंक समूह के बीच सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ बॉन्ड बाजारों को विकसित करने और निजी निवेश बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में कॉरपोरेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजारों को मजबूत बनाने के लिए विश्व बैंक समूह की भूमिका बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
1.5 अरब डॉलर के विकास वित्तपोषण पर चर्चा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने भारत के साथ विश्व बैंक समूह के लगातार सहयोग की सराहना की। उन्होंने भारत के लिए 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के विकास नीति वित्तपोषण (DPF) के त्वरित प्रसंस्करण का भी उल्लेख किया।
सीतारमण ने कहा कि इस तरह के सहयोग से भारत की विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। बैठक में विश्व बैंक समूह के वित्तीय संसाधनों और विशेषज्ञता का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
MSME सेक्टर के लिए IFC के समर्थन की सराहना
वित्त मंत्री ने छोटे और मध्यम कारोबारों यानी MSMEs के लिए इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) की ओर से किए गए सहयोग की भी सराहना की।
मंत्रालय के मुताबिक, SIDBI के माध्यम से MSME क्षेत्र को दिए गए इस समर्थन को कम समय में मंजूरी और संसाधित किया गया। इससे देश के छोटे कारोबारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और क्षेत्र के विकास को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
also read: SCO Summit में आतंकवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सख्त संदेश…
बॉन्ड मार्केट को मजबूत बनाने में MIGA की बड़ी भूमिका
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय भारत के बॉन्ड बाजारों को और गहरा करना रहा। दोनों पक्षों ने कॉरपोरेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजारों में निजी पूंजी जुटाने के लिए विश्व बैंक समूह की Multilateral Investment Guarantee Agency (MIGA) की भूमिका बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।
इसके तहत गारंटी जैसे वित्तीय साधनों के व्यवस्थित इस्तेमाल पर जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि निजी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया जाए और देश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ज्यादा पूंजी उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए क्रेडिट एन्हांसमेंट की दिशा में सेक्टर आधारित और कार्यक्रम आधारित मॉडल पर भी चर्चा हुई।
अजय बंगा ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की सराहना की
विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत में पिछले वर्षों के दौरान हुए बुनियादी ढांचे के बदलाव की सराहना की। उन्होंने भारत की विकास योजनाओं को समर्थन देने के लिए विश्व बैंक समूह के विभिन्न वित्तीय साधनों का अधिक इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इसमें MIGA की भागीदारी और विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों को राजनीतिक जोखिम बीमा उपलब्ध कराने जैसे विकल्प भी शामिल रहे।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हुई बातचीत
निर्मला सीतारमण ने भारत में एक ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज सेंटर स्थापित करने की दिशा में विश्व बैंक समूह के साथ भारत के सहयोग का मुद्दा भी उठाया।
इस पहल के तहत कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। वित्त मंत्री ने इस केंद्र को शुरू करने की दिशा में जल्द प्रगति की उम्मीद जताई।
पर्यटन क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की योजना
बैठक में नए भारत-विश्व बैंक समूह कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा हुई।
इस मॉडल में विश्व बैंक के International Bank for Reconstruction and Development (IBRD) की नीतिगत और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता, IFC के निवेश और MIGA की गारंटी को एक साथ इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया गया।
रणनीतिक ज्ञान और निवेश साझेदारी बनाने पर जोर
दोनों नेताओं ने भारत और विश्व बैंक समूह के संबंधों को केवल पारंपरिक वित्तीय सहयोग तक सीमित रखने के बजाय इसे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
इस प्रस्तावित मॉडल में वैश्विक ज्ञान, तकनीकी नवाचार और निजी पूंजी जुटाने पर जोर होगा। भारत की बड़े स्तर पर योजनाओं को लागू करने की क्षमता को विश्व बैंक समूह की वैश्विक विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों के साथ जोड़ा जा सकता है।
इससे भारत और विश्व बैंक के बीच सहयोग को विकास वित्तपोषण से आगे ले जाकर ज्ञान, नवाचार, बुनियादी ढांचे और निजी निवेश पर केंद्रित एक रणनीतिक मंच के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

