अमेरिकी निगरानी रिपोर्ट में ईरान युद्ध के बाद हथियार भंडार पर दबाव, सैन्य ठिकानों, विमानों को नुकसान और 37.5 अरब डॉलर खर्च होने का खुलासा।
ईरान के साथ हुए युद्ध के बाद अमेरिकी सैन्य क्षमता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी रक्षा विभाग के महानिरीक्षक की रिपोर्ट में उन्नत हथियारों के रणनीतिक भंडार में कमी, सैन्य उपकरणों को हुए नुकसान और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर पड़े प्रभाव की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध ने अमेरिका के रक्षा उत्पादन तंत्र और हथियारों की तेजी से भरपाई करने की क्षमता के सामने कई चुनौतियां उजागर की हैं।
अमेरिकी हथियार भंडार पर पड़ा दबाव
पेंटागन भले ही लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि अमेरिकी सेना के पास हथियारों की गंभीर कमी है, लेकिन निगरानी संस्था की रिपोर्ट में उन्नत हथियारों के स्टॉक में कमी का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के रणनीतिक हथियार भंडार पर दबाव बढ़ा। साथ ही, इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद और मिसाइलों को दोबारा स्टॉक करने में अमेरिकी रक्षा उद्योग के सामने उत्पादन क्षमता से जुड़ी बाधाएं सामने आईं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ अत्याधुनिक मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर को युद्ध से पहले के स्तर तक पहुंचाने में अमेरिकी रक्षा कंपनियों को करीब तीन साल तक का समय लग सकता है।
ट्रंप ने हथियार उत्पादन पर दिया जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन रिपोर्टों के बीच सोशल मीडिया पर अमेरिकी हथियार उत्पादन का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने इतिहास के किसी भी दौर की तुलना में अधिक आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले हथियार तैयार कर रहा है।
ट्रंप के मुताबिक, इन हथियारों की लगातार मध्य पूर्व समेत अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों तक आपूर्ति की जा रही है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरानी हमलों का असर केवल हथियारों के भंडार तक सीमित नहीं रहा। कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की कई इमारतों और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा।
बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डा भी ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के निशाने पर आया। यह बेस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक सेंटर माना जाता है।
हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड को कुछ सप्लाई रूट दूसरे केंद्रों की ओर मोड़ने पड़े। रिपोर्ट में बताया गया कि वैकल्पिक लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण मध्य पूर्व में अभियानों के लिए 14 से 18 दिनों तक का सप्लाई चक्र जरूरी हो गया।
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अमेरिकी विमान और ड्रोन भी हुए प्रभावित
ईरानी हमलों में अमेरिका के कई विमानों और ड्रोन को नुकसान पहुंचने या उनके नष्ट होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हुए। प्रत्येक ड्रोन की अनुमानित कीमत लगभग 30 मिलियन डॉलर बताई गई है। इसके अलावा सात KC-135 ईंधन भरने वाले विमान भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए। इनमें पांच विमान सऊदी अरब में जमीन पर मौजूद होने के दौरान ईरानी हमलों की चपेट में आए।
इराक में एक अन्य KC-135 विमान दुर्घटना का शिकार हुआ। एक अन्य KC-135 से टक्कर के बाद हुए इस हादसे में छह अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हुई।
सैन्यकर्मियों की भी गई जान
रिपोर्ट के मुताबिक, KC-135 दुर्घटना में मारे गए छह सैन्यकर्मियों के अलावा अरब सागर में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में एक पायलट की भी मौत हुई। इन घटनाओं को गैर-युद्धकालीन घटनाओं के रूप में दर्ज किया गया।
इसके अलावा कुवैत, इराक, जॉर्डन और सऊदी अरब में 11 अन्य अमेरिकी सैन्यकर्मियों को युद्ध में मारे गए सैनिकों के तौर पर दर्ज किया गया।
युद्ध पर खर्च हुए 37.5 अरब डॉलर
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने जुलाई के अंत में कांग्रेस को बताया था कि ईरान के खिलाफ युद्ध पर अमेरिका अब तक करीब 37.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।
वहीं, अमेरिकी राजनयिक सुविधाओं को हुए नुकसान का आंकड़ा भी रिपोर्ट में सामने आया है। इराक, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को हुए नुकसान की अनुमानित लागत करीब 184 मिलियन डॉलर बताई गई है।
अमेरिकी नागरिकों की निकासी पर भी खर्च
युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों को मध्य पूर्व से बाहर निकाला गया। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, करीब 9,000 अमेरिकी नागरिकों को मध्य पूर्व और यूरोप के अलग-अलग देशों से निकाला गया।
इन लोगों को निजी और व्यावसायिक उड़ानों के साथ-साथ सड़क और समुद्री मार्गों से भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जून के अंत तक इस निकासी अभियान पर 11 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च होने की जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल से सबसे ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया। इसके बाद इराक और जॉर्डन से भी अमेरिकी नागरिकों को निकाला गया। यूएई से करीब 1,200 अमेरिकी नागरिकों को निकाला गया और इस्तांबुल, एथेंस तथा वॉशिंगटन से जुड़ी यात्राओं पर 4 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च हुआ।
अमेरिका ने अरबों डॉलर के हथियार बेचे
रिपोर्ट में अमेरिकी हथियारों की बिक्री का भी उल्लेख किया गया है। इस अवधि के दौरान आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सैन्य बिक्री के तहत 44 अरब डॉलर से अधिक के सौदे हुए।
इनमें बड़ी हिस्सेदारी सऊदी अरब की रही। बिक्री में सैन्य हेलीकॉप्टर, गोला-बारूद, गोला-बारूद से जुड़े उपकरण और अत्याधुनिक सटीक हथियार प्रणालियां शामिल थीं।
ईरानी जवाबी कार्रवाई के बाद कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल समेत क्षेत्र के अन्य देशों को भी अमेरिकी सैन्य उपकरणों की अरबों डॉलर की बिक्री हुई।
रिपोर्ट ने बढ़ाई अमेरिकी सैन्य क्षमता पर बहस
अमेरिकी निगरानी संस्था की रिपोर्ट ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना के सामने आई चुनौतियों की विस्तृत तस्वीर पेश की है। हथियारों के भंडार में कमी, रक्षा उत्पादन की सीमाएं, सैन्य ठिकानों को नुकसान और बड़े पैमाने पर खर्च ने अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की क्षमता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि देश के पास अपने सैन्य अभियानों के लिए पर्याप्त हथियार और संसाधन मौजूद हैं। ऐसे में आने वाले समय में हथियारों के पुनर्भंडारण और रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाना अमेरिका के लिए अहम चुनौती हो सकता है।

