प्रयागराज में मुख्यमंत्री योगी ने वकीलों के लिए 5 लाख तक कैशलेस इलाज और कल्याण निधि बढ़ाने का ऐलान किया। केशव मौर्य ने 2027 चुनाव पर समर्थन मांगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में अधिवक्ताओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में सीएम योगी ने वकीलों को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देने की बात कही। इसके साथ ही अधिवक्ता कल्याण निधि और विधि अधिकारियों की फीस में बढ़ोतरी सहित कई अन्य फैसलों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए अधिवक्ताओं से सरकार के कामकाज के आधार पर समर्थन देने की अपील की।
वकीलों के लिए 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को हर साल 5 लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा से जोड़ा जाएगा। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं को स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि बढ़ाई
योगी सरकार ने अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी सहायता राशि में भी इजाफा किया है। अधिवक्ता कल्याण निधि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की गई है।
इसके अलावा दिवंगत अधिवक्ताओं के आश्रितों को मिलने वाली सहायता के लिए पात्रता की अधिकतम आयु सीमा भी बढ़ाई गई है। अब यह सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है।
400 राज्य विधि अधिकारियों को मिलेंगे टैबलेट
सरकार ने न्यायिक मामलों की बेहतर मॉनिटरिंग और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
इसके साथ ही जिला न्यायालयों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सरकार का पक्ष रखने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।
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वकीलों के चैंबर के लिए सरकार देगी आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं के चैंबर से जुड़े प्रस्तावों पर भी सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया। नए चैंबरों में फर्नीचर और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से आने वाले प्रस्तावों पर सरकार वित्तीय सहायता देगी।
इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।
केशव मौर्य ने 2027 चुनाव का किया जिक्र
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि हर पांच साल में जनता की अदालत में जाते हैं।
अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे लोगों का मुकदमा लड़ते हैं और अब सरकार अपना 2027 का मुकदमा उनकी अदालत में छोड़कर जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार के कामों के आधार पर अधिवक्ताओं का समर्थन और आशीर्वाद मिलेगा।
कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर निशाना
केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों तक सीमित था, जबकि जमीन पर अपराधियों का प्रभाव था।
उन्होंने कहा कि योगी सरकार की नीति स्पष्ट है कि निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मुख्य न्यायमूर्ति ने बार-बेंच के तालमेल को बताया जरूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय को न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि बार और बेंच एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, बल्कि न्याय प्रणाली के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उनके मुताबिक, अधिवक्ताओं के सामूहिक ज्ञान और योगदान ने देश की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
युवा वकीलों के लिए बेहतर माहौल पर जोर
मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि युवा अधिवक्ता इस ऐतिहासिक संस्था की विरासत के भविष्य के संरक्षक हैं। इसलिए उन्हें बेहतर काम के अवसरों के साथ ऐसा वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वे पेशेवर दक्षता और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ सकें।
उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए बनाए गए नए चैंबर और पार्किंग सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचा केवल निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि इससे वकीलों को सम्मानजनक और सुविधाजनक कार्य वातावरण उपलब्ध होता है।
न्यायपालिका और सरकार के बीच सहयोग जरूरी
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका की अपनी-अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं। संस्थागत स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच सहयोग की कोई गुंजाइश नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनहित, त्वरित न्याय और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी है। प्रदेश में बनाए जा रहे एकीकृत अदालत परिसरों को उन्होंने इस सहयोग का उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में दिखा उत्साह
सीएम योगी के कार्यक्रम में अधिवक्ताओं के बीच खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल पर उनके पहुंचने पर अधिवक्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमित सिंह ‘सोनू’ ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उनके पैर छुए और दंडवत भी हुए।
कुल मिलाकर, प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार ने अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े कई बड़े फैसलों का ऐलान किया। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य के 2027 चुनाव के संदर्भ वाले बयान ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी खास बना दिया।

