हरियाणा में नगर निकाय और पंचायत चुनावों का ऐलान, 10 मई को मतदान और 528 सीटों पर उपचुनाव, आचार संहिता लागू।
हरियाणा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नई गति देते हुए हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की घोषणा कर दी है। राज्य चुनाव आयुक्त देविंदर सिंह कल्याण ने पंचकूला स्थित आयोग मुख्यालय से चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि राज्य के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया 10 मई 2026 को संपन्न होगी। इस घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर स्थानांतरण और नई घोषणाओं पर रोक लगा दी गई है।
घोषणा के अनुसार, अंबाला, पंचकूला और सोनीपत जैसे प्रमुख नगर निगमों में महापौर और पार्षदों के चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही रेवाड़ी नगर परिषद और सांपला, धारूहेड़ा व उकलाना नगर पालिकाओं के अध्यक्षों और वार्ड सदस्यों के लिए भी मतदान होगा। वहीं टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, कनीना और साढौरा क्षेत्रों में नगर परिषद और नगर पालिकाओं की कुछ रिक्त सीटों पर उपचुनाव भी आयोजित किए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी चुनावी गतिविधियां तेज होंगी, जहां पंचायती राज संस्थाओं के तहत हिसार और कैथल जिलों की ग्राम पंचायतों में आम चुनाव होंगे। इसके अलावा पूरे राज्य में 528 खाली पदों—जिनमें पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं—पर उपचुनाव कराए जाएंगे। यह चुनाव राज्य के ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया के तहत 15 अप्रैल को नामांकन का नोटिस जारी होगा और उम्मीदवार 21 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 27 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 28 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा। मतदान 10 मई को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक होगा, जबकि नगर निकायों के परिणाम 13 मई को घोषित किए जाएंगे। पंचायत चुनावों की मतगणना मतदान के तुरंत बाद या आवश्यकता पड़ने पर तय तिथि के अनुसार पूरी की जाएगी।
आयोग ने उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित की है, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 10वीं पास होना अनिवार्य है, जबकि महिलाओं और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 8वीं पास योग्यता तय की गई है। कुछ विशेष श्रेणियों में यह योग्यता 5वीं पास तक रखी गई है, जिससे अधिक लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर मिल सके।
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चुनाव खर्च को नियंत्रित करने के लिए आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगर निगम महापौर के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये और पार्षदों के लिए 7.50 लाख रुपये की सीमा तय की गई है, जबकि पंचायत स्तर पर सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के लिए अलग-अलग खर्च सीमा निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को चुनाव परिणाम के 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का पूरा विवरण जमा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को अपने मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। साथ ही चुनाव में ईवीएम मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें मतपत्रों के रंग और उम्मीदवारों की फोटो भी शामिल होगी। मतदाताओं को ‘नोटा’ (NOTA) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे वे अपनी असहमति दर्ज कर सकें।
मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए आयोग ने निर्देश दिए हैं कि इस बार वोटर स्लिप घर-घर पहुंचाई जाएगी, ताकि मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र की जानकारी समय पर मिल सके। इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस बल की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी के लिए नियुक्त किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में होने वाले ये चुनाव न केवल स्थानीय प्रशासन को मजबूत करेंगे, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी और गहरा करेंगे। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने के साथ-साथ विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

