पंजाब में निजी स्कूल फीस बढ़ाने से पहले 90 दिन की सूचना देंगे। नए नियमों के तहत सामान्य फीस वृद्धि 5% तक सीमित और अतिरिक्त वसूली पर जुर्माना होगा।
पंजाब में निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं। सरकार ने Punjab Regulation of Fee of Unaided Educational Institutions (Amendment) Act, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत निजी स्कूल अब एक शैक्षणिक सत्र में सामान्य परिस्थितियों में फीस में 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे।
फीस में बदलाव करने से पहले स्कूलों को अभिभावकों को इसकी जानकारी समय रहते देनी होगी। नए नियमों का उद्देश्य फीस वृद्धि में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों पर अचानक बढ़ने वाले आर्थिक बोझ को रोकना है।
फीस बढ़ाने से 90 दिन पहले देना होगा नोटिस
नए कानून के अनुसार, फीस में प्रस्तावित बढ़ोतरी की जानकारी स्कूल को कम से कम 90 दिन पहले अपने परिसर में सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ ही स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी सूचना उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
इसके अलावा, प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर का विवरण शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम 180 दिन पहले संबंधित रेगुलेटरी बोर्ड के पास भेजना होगा। रेगुलेटरी बोर्ड की लिखित मंजूरी मिलने से पहले स्कूल नई फीस लागू नहीं कर पाएंगे।
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अतिरिक्त फीस वसूलने पर स्कूलों को देना होगा रिफंड
सरकार ने अभिभावकों से अतिरिक्त फीस वसूली के मामले में भी कड़े प्रावधान किए हैं। यदि रेगुलेटरी बोर्ड किसी स्कूल को अतिरिक्त रकम वापस करने का निर्देश देता है, तो स्कूल को निर्धारित समय के भीतर राशि लौटानी होगी।
यदि स्कूल आदेश के बावजूद 30 दिनों के भीतर अतिरिक्त फीस वापस नहीं करता, तो उस पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
गंभीर स्थिति में स्कूल की मान्यता (Recognition) और एफिलिएशन वापस लेने की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, ऐसी कार्रवाई से पहले संबंधित स्कूल को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
पिछले 36 महीने की फीस बढ़ोतरी भी जांच के दायरे में
नए कानून में सिर्फ आगामी फीस वृद्धि ही नहीं, बल्कि पिछले 36 महीनों में हुई फीस बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखा गया है।
यदि किसी स्कूल की कुल फीस वृद्धि संबंधित शैक्षणिक वर्ष की फीस के मुकाबले 15 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है, तो निर्धारित सीमा से ऊपर वसूली गई रकम को प्रभावित छात्र या उसके अभिभावक को वापस करना होगा।
5 और 10 प्रतिशत की संचयी सीमा का प्रावधान
रिफंड की गणना के लिए पढ़ाई की अवधि के आधार पर संचयी सीमा भी तय की गई है। एक वर्ष तक पढ़ने वाले छात्र के मामले में 5 प्रतिशत और दो वर्ष तक पढ़ने वाले छात्र के मामले में 10 प्रतिशत की अनुमत संचयी सीमा को आधार बनाया जाएगा।
इस सीमा से अधिक वसूली गई फीस को नियमों के अनुसार वापस करना होगा। सरकार के नए प्रावधानों से निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ने और अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि से राहत मिलने की उम्मीद है।

