उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया। ED की कार्रवाई के बाद जानें उनके फैसले की वजह और पूरा मामला।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला किया है। रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है।
हरीश रावत का यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सामने आया है। इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राज्य में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ चेहरे के संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ED की कार्रवाई के बाद रावत ने लिया फैसला
शुक्रवार को चंदन सिंह जीना के घर ED की छापेमारी की खबर सामने आई। इसके बाद देर रात हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट की।
रावत ने कहा कि जीना लंबे समय तक उनके साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित किसी मामले में जीना की भूमिका साबित होती है तो वह उस पर शर्मिंदा होंगे, हालांकि फिलहाल लगाए गए आरोपों पर उन्हें विश्वास नहीं है।
बोले- पार्टी के संघर्ष पर असर नहीं पड़ना चाहिए
हरीश रावत ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे समय में उनकी वजह से पार्टी के संघर्ष को किसी भी तरह की कमजोरी नहीं मिलनी चाहिए।
इसी वजह से उन्होंने संगठन में अपने दोनों पद छोड़ने का निर्णय लिया। रावत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उनका इस्तीफा संगठनात्मक जिम्मेदारियों से संबंधित है।
also read: पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट किया ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण, बताया…
चुनाव से पहले इस्तीफे ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं। ऐसे समय में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हरीश रावत का संगठनात्मक पदों से हटना पार्टी के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
रावत ने अपने बयान में चुनावी माहौल और जांच एजेंसियों की सक्रियता को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस बार जांच की कार्रवाई उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के यहां हुई है और इसे एक खास राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी दी सफाई
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सरकारी भर्तियों और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती हुई थी।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में भर्ती बोर्ड गठित किए थे और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया गया था।
बोले- गलती हुई तो राज्य के युवाओं से माफी
भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए रावत ने कहा कि यदि उनके कार्यकाल में जाने-अनजाने कोई ऐसी गलती हुई, जिससे राज्य के युवाओं को नुकसान पहुंचा हो, तो वह इसके लिए उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के पास भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता से जुड़े प्रमाण हैं, तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
रावत ने खुद को जांच के लिए प्रस्तुत किया
हरीश रावत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में बड़े पदों की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों को किसी भी तरह के अनुचित प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी ओर से कोई चूक हुई है तो कानून के अनुसार उन्हें दंड मिलना चाहिए।
उनके इस फैसले के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर और राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर इसका कितना असर पड़ता है।

