चंडीगढ़ किराएदारी नियम 2026: चंडीगढ़ में किराएदार और मकान मालिकों के लिए नए नियम लागू, किराएदारी 2 महीने में दर्ज करानी होगी और 15 दिन में जवाब देना होगा।
चंडीगढ़ प्रशासन ने किराएदारी से जुड़े विवादों को जल्द और पारदर्शी तरीके से सुलझाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। एस्टेट विभाग की ओर से ‘यूटी चंडीगढ़ किराएदारी नियम 2026’ को अधिसूचित किया गया है। ये प्रावधान पूरे चंडीगढ़ में प्रभावी होंगे।
नए नियमों के तहत किराए, बकाया राशि, मकान पर कब्जे और अन्य किराएदारी विवादों के समाधान के लिए तीन स्तर की व्यवस्था बनाई गई है। इसमें रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल शामिल हैं।
2 महीने में दर्ज करनी होगी किराएदारी
नए प्रावधानों के अनुसार, किराए का समझौता होने के बाद उसकी जानकारी दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को देनी होगी। मकान मालिक और किराएदार इसे संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करा सकेंगे।
जानकारी जमा होने के बाद रेंट अथॉरिटी की ओर से 7 दिनों के भीतर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) जारी किया जाएगा। यह ई-रसीद के रूप में संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराया जाएगा।
किराएदारी से जुड़े दस्तावेज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाएंगे। इसमें OTP के जरिए सत्यापन की सुविधा भी होगी। रिकॉर्ड की पहुंच केवल संबंधित पक्षों और अधिकृत अधिकारियों तक सीमित रखी जाएगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेगी रेंट अथॉरिटी
नियमों के मुताबिक रेंट अथॉरिटी को अपनी स्थापना के तीन महीने के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना होगा। इसका उद्देश्य किराएदारी के रिकॉर्ड को व्यवस्थित और ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।
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बिजली-पानी और मेंटेनेंस खर्च पर भी शिकायत
नए नियम सिर्फ किराए से जुड़े विवादों तक सीमित नहीं हैं। अगर मकान मालिक और किराएदार के बीच बिजली, पानी, मेंटेनेंस या सुरक्षा सेवाओं के शुल्क को लेकर मतभेद होता है, तो दोनों में से कोई भी पक्ष रेंट अथॉरिटी का रुख कर सकता है। मामले पर फैसला लेते समय संबंधित क्षेत्र में प्रचलित किराए की दरों को भी आधार बनाया जा सकता है।
मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो क्या होगा?
अगर मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है या किराए की रसीद देने से बचता है, तो किराएदार लगातार दो महीने तक RTGS, NEFT, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए भुगतान कर सकता है।
यदि इसके बाद भी मकान मालिक किराया स्वीकार नहीं करता, तो किराएदार निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि रेंट अथॉरिटी के पास जमा कर सकता है।
15 दिन के भीतर देना होगा जवाब
रेंट अथॉरिटी के सामने शिकायत या मामला आने के बाद संबंधित दूसरे पक्ष को 15 दिनों के अंदर जवाब देना होगा। उचित कारण होने पर यह समयसीमा अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। वहीं, रेंट ट्रिब्यूनल में दाखिल अपील पर नोटिस की तामील के बाद 60 दिनों के भीतर फैसला करने का प्रावधान किया गया है।
बार-बार नहीं मिलेगा स्थगन
नए नियमों के तहत सामान्य परिस्थितियों में किसी मामले में केवल एक बार स्थगन दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा रेंट कोर्ट के आदेश का पालन नोटिस की तामील के 30 दिनों के भीतर किया जाना होगा।
मकान मालिक और किराएदार दोनों को मिलेगा फायदा
डीसी-कम-एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव के मुताबिक, नए किराएदारी नियमों से मकान मालिक और किराएदार के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही किराए से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया उपलब्ध होगी।
इन नियमों के लागू होने से चंडीगढ़ में किराएदारी समझौतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और विवादों को निर्धारित समयसीमा में सुलझाने की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

