उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके आदर्श सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के प्रेरणास्रोत हैं।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा के विचार और आदर्श आज भी राष्ट्र को समावेशी विकास और सशक्त समाज की दिशा में प्रेरित कर रहे हैं।
आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष की मिसाल
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने जीवनकाल में आदिवासी समाज के अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों को अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
also read: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम गरीब कल्याण योजना के 12 साल पूरे होने पर…
उलगुलान आंदोलन का किया स्मरण
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा के नेतृत्व में चला ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आंदोलन भारतीय इतिहास में जनजागरण और प्रतिरोध का महत्वपूर्ण अध्याय है। इस आंदोलन ने आदिवासी समुदायों में आत्मविश्वास और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संचार किया।
बलिदान और विचारों से मिलती है प्रेरणा
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि बिरसा मुंडा का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचार सामाजिक समानता, न्याय और सशक्तिकरण की दिशा में आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।
जन्मस्थली से जुड़ी यादों का किया उल्लेख
राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें झारखंड में बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला था। उन्होंने इसे अपने जीवन का एक विशेष और प्रेरणादायक अनुभव बताया।
समावेशी विकास के लिए मार्गदर्शक हैं बिरसा मुंडा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बिरसा मुंडा के आदर्श देश को सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और जनसशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। उनकी विरासत राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में हमेशा मार्गदर्शक बनी रहेगी।

