तमिल विद्वान और पट्टिमंड्रम संचालक सोलोमन पप्पैया का 90 साल की उम्र में निधन। जानें उनका जीवन, परिवार, फिल्में, पुरस्कार और विरासत।
तमिल भाषा और साहित्य की दुनिया के चर्चित नाम सोलोमन पप्पैया का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 11 सितंबर 2026 को मदुरै के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका निधन हुआ। पट्टिमंड्रम के जरिए तमिल साहित्य और सामाजिक विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही।
कौन थे सोलोमन पप्पैया?
सोलोमन पप्पैया का जन्म 22 फरवरी 1936 को मदुरै में हुआ था। वह तमिल के जाने-माने विद्वान, प्रोफेसर, लेखक और सार्वजनिक वक्ता थे। उनकी सबसे बड़ी पहचान पट्टिमंड्रम यानी तमिल बहस कार्यक्रमों के संचालक के तौर पर बनी।
उनकी खास बोलने की शैली बेहद सहज और आम लोगों से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से उन्होंने तमिल साहित्य और सामाजिक मुद्दों से जुड़े जटिल विषयों को सरल अंदाज में बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचाया।
शिक्षा और प्रोफेसर के तौर पर करियर
पप्पैया ने द अमेरिकन कॉलेज से पढ़ाई की और बाद में थियागराजर कॉलेज से तमिल में पोस्टग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने द अमेरिकन कॉलेज में अध्यापन शुरू किया और आगे चलकर तमिल विभाग के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाली।
1960 के दशक से वह तमिल साहित्यिक कार्यक्रमों और पट्टिमंड्रम से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले बहस कार्यक्रमों ने उनकी लोकप्रियता को तमिलनाडु के घर-घर तक पहुंचा दिया।
पत्नी और बच्चों का परिवार
सोलोमन पप्पैया की पत्नी जयबाई का जनवरी 2025 में निधन हो चुका था। दंपति के एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी बेटी विमला सोलोमन जापानी भाषा की प्रोफेसर हैं।
फिल्मों में भी नजर आए
सोलोमन पप्पैया ने साहित्य और टेलीविजन के साथ सिनेमा में भी काम किया। वह कुछ तमिल फिल्मों में अभिनय करते दिखाई दिए। उनकी फिल्मोग्राफी में पुधु वरुशम (1992), बॉयज (2003), यस मैडम (2003) और शिवाजी: द बॉस (2007) जैसी फिल्में शामिल हैं। निर्देशक शंकर की फिल्म बॉयज और शिवाजी: द बॉस में भी उन्होंने अभिनय किया था।
कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
तमिल भाषा और साहित्य में उनके योगदान को कई सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें वर्ष 2000 में कलाइमामणि पुरस्कार मिला। इसके बाद 2010 में अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने उन्हें मुत्तमिझ पेरारिग्नर सम्मान प्रदान किया।
सोलोमन पप्पैया के करियर का सबसे बड़ा सम्मान 2021 में पद्म श्री रहा। उन्हें साहित्य और शिक्षा-पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया था।
सोलोमन पप्पैया की कुल संपत्ति कितनी थी?
सोलोमन पप्पैया की कुल संपत्ति को लेकर कोई भरोसेमंद आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इंटरनेट पर बताई जाने वाली किसी निश्चित नेटवर्थ को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
पट्टिमंड्रम को लोकप्रिय बनाने में अहम योगदान
सोलोमन पप्पैया की सबसे बड़ी विरासत तमिल पट्टिमंड्रम को आम दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाना मानी जाती है। उन्होंने बहस के विषयों को केवल साहित्य तक सीमित रखने के बजाय परिवार, समाज और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े मुद्दों से भी जोड़ा।
उनकी सहज भाषा, हास्य और तमिल पर मजबूत पकड़ ने पट्टिमंड्रम को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस कला को गांवों और व्यापक जनता तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तमिल साहित्य जगत में छोड़ी अमिट छाप
सोलोमन पप्पैया ने किताबें भी लिखीं और तमिल साहित्य को सरल रूप में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। उनका योगदान कक्षा और अकादमिक दुनिया से आगे बढ़कर टेलीविजन, सार्वजनिक विमर्श और सिनेमा तक फैला रहा।
90 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ तमिलनाडु ने एक ऐसे विद्वान और वक्ता को खो दिया, जिसने दशकों तक भाषा, साहित्य और सामाजिक संवाद को आम लोगों से जोड़ने का काम किया।

