Haiwaan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म कैसी है? जानें कहानी, एक्टिंग, डायरेक्शन, सस्पेंस और फिल्म की पूरी समीक्षा।
Haiwaan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘हैवान’ 11 सितंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। लंबे समय बाद दोनों कलाकार एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आ रहे हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता थी, लेकिन शुरुआती शो देखने के बाद कहानी और प्रस्तुति उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आती।
‘हैवान’ साल 2016 में आई मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रीमेक है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हिंदी संस्करण में सैफ अली खान ने एक दृष्टिहीन किरदार निभाया है, जबकि अक्षय कुमार को नकारात्मक भूमिका में देखा गया है। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है, जिन्होंने मूल फिल्म भी बनाई थी।
कैसी है ‘हैवान’ की कहानी?
फिल्म की कहानी सैफ अली खान के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है। वह एक नेत्रहीन व्यक्ति हैं, जो पेशे से सिंगर और पहलवान हैं। साथ ही वह मेंटेनेंस मैनेजर के तौर पर भी काम करते हैं। उनके सामने बहन की शादी की जिम्मेदारी है और इसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत है।
कहानी में अक्षय कुमार के किरदार पर दुष्कर्म का आरोप लगता है। बोमन ईरानी फिल्म में जज की भूमिका में दिखाई देते हैं। अदालत से सजा मिलने के बाद कहानी बदले और अपराध की दिशा में आगे बढ़ती है।
फिल्म की कहानी में बदला और अपराध का एंगल मौजूद है, लेकिन इसे जिस तरह से पर्दे पर पेश किया गया है, वह प्रभाव पैदा करने में कमजोर साबित होता है।
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सैफ अली खान की एक्टिंग कैसी है?
सैफ अली खान फिल्म के केंद्र में हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं लगता। नेत्रहीन किरदार को निभाते हुए उनकी बॉडी लैंग्वेज और अभिनय कई जगह बनावटी महसूस होता है।
एक ऐसे किरदार से भावनात्मक जुड़ाव बनना चाहिए था, लेकिन फिल्म ऐसा करने में सफल नहीं हो पाती। उनकी परफॉर्मेंस कहानी को मजबूत करने के बजाय कई जगह उसकी गति को और धीमा करती नजर आती है।
अक्षय कुमार भी नहीं छोड़ पाए खास प्रभाव
अक्षय कुमार को फिल्म में ग्रे और नकारात्मक शेड वाले किरदार में पेश किया गया है। उनके किरदार से काफी उम्मीद की जा सकती थी, लेकिन स्क्रीन पर वह अपेक्षित असर पैदा नहीं कर पाता।
अक्षय और सैफ के बीच टकराव फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन दोनों के बीच की केमिस्ट्री और तनाव कहानी को उस स्तर तक नहीं ले जा पाते, जहां दर्शक पूरी तरह जुड़ सकें।
प्रियदर्शन का निर्देशन कितना प्रभावी?
प्रियदर्शन ‘ओप्पम’ जैसी सफल फिल्म का निर्देशन पहले ही कर चुके हैं, इसलिए ‘हैवान’ से उम्मीदें स्वाभाविक रूप से ज्यादा थीं। मगर हिंदी रीमेक में वह मूल फिल्म वाला प्रभाव दोहराते नजर नहीं आते।
फिल्म का पहला भाग काफी धीमा महसूस होता है। कई दृश्यों में कहानी आगे बढ़ने के बजाय खिंचती हुई नजर आती है। क्राइम थ्रिलर में जिस तरह का तनाव और उत्सुकता होनी चाहिए, वह यहां लगातार महसूस नहीं होती।
दूसरे भाग में भी स्थिति में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आता। कहानी के अगले घटनाक्रम का अनुमान पहले ही लगने लगता है, जिससे सस्पेंस कमजोर पड़ जाता है।
फिल्म में सस्पेंस और थ्रिल की कमी
क्राइम थ्रिलर की सबसे बड़ी ताकत उसका रहस्य और रोमांच होता है। दर्शक लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि आगे क्या होने वाला है। लेकिन ‘हैवान’ में यह उत्सुकता लंबे समय तक कायम नहीं रह पाती।
कई महत्वपूर्ण घटनाओं का अंदाजा पहले ही लग जाता है। इसी वजह से कहानी का थ्रिलिंग पक्ष कमजोर हो जाता है। फिल्म में कुछ ऐसे मौके थे जहां रोमांच बढ़ाया जा सकता था, लेकिन निर्देशन और स्क्रीनप्ले उन्हें प्रभावी बनाने में सफल नहीं रहे।
कमजोर कास्टिंग भी बनी परेशानी
फिल्म की सबसे बड़ी कमियों में से एक इसकी कास्टिंग भी नजर आती है। कहानी जिस तरह के प्रभावशाली किरदारों की मांग करती है, कलाकार उस असर को पूरी तरह पर्दे पर नहीं ला पाते। नतीजा यह होता है कि कहानी में मौजूद गंभीर और भावनात्मक क्षण भी दर्शकों पर अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ते।
Haiwaan Review: कैसी है फिल्म?
कुल मिलाकर, ‘हैवान’ एक ऐसी क्राइम थ्रिलर है जो अपनी कहानी और स्टारकास्ट के बावजूद दर्शकों को बांधे रखने में संघर्ष करती दिखाई देती है। सैफ अली खान और अक्षय कुमार जैसे बड़े नामों से उम्मीदें काफी थीं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, धीमी गति और सीमित सस्पेंस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरियां बन जाती हैं।
मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ में जिस तरह का रोमांच देखने को मिला था, ‘हैवान’ उसका प्रभावी हिंदी रूपांतरण करने में सफल नहीं लगती। अगर आप एक तेज-तर्रार और लगातार रोमांच बनाए रखने वाली क्राइम थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म आपको निराश कर सकती है।

