ब्रेन हेल्थ के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें। याददाश्त कमजोर होना, शब्द भूलना, निर्णय लेने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो तो सतर्क रहें।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर के साथ-साथ दिमाग की कार्यक्षमता में भी कुछ बदलाव आ सकते हैं। हालांकि हर बार भूलने या ध्यान कम होने को सामान्य उम्र का हिस्सा मानना सही नहीं होता। याददाश्त में लगातार गिरावट, बातचीत के दौरान सही शब्द याद न आना, फैसले लेने में परेशानी और रोजमर्रा के कामों में अचानक दिक्कत जैसे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मस्तिष्क से जुड़े कुछ बदलाव धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कई बार व्यक्ति या उसके परिवार के लोगों को शुरुआती चरण में इनका पता भी नहीं चलता। इसलिए ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
सिर्फ भूलने की समस्या को ब्रेन एजिंग न समझें
कभी-कभार किसी का नाम, कोई तारीख या छोटी-सी बात भूल जाना सामान्य हो सकता है। ऐसी घटनाएं किसी भी उम्र में हो सकती हैं और जरूरी नहीं कि उनका संबंध डिमेंशिया जैसी बीमारी से हो।
लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और उसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। एक ही सवाल बार-बार पूछना, हाल की महत्वपूर्ण घटनाओं को याद रखने में परेशानी या जरूरी जानकारी बार-बार भूलना ऐसे संकेत हो सकते हैं जिनकी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
बातचीत में सही शब्द ढूंढने में परेशानी
दिमाग की कार्यक्षमता में बदलाव केवल याददाश्त से ही जुड़े नहीं होते। बातचीत के दौरान सामान्य या परिचित शब्दों को याद करने में लगातार परेशानी होना भी ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है।
इसी तरह किसी बातचीत या निर्देश को समझने में पहले की तुलना में ज्यादा समय लगना, चीजों की दिशा या स्थान को लेकर भ्रम होना और निर्णय लेने में परेशानी जैसे बदलाव भी नजरअंदाज नहीं किए जाने चाहिए। अगर इस तरह की समस्या लगातार बनी रहती है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
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रोजमर्रा के काम अचानक मुश्किल लगने लगें
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी काम को आसानी से करता आया है, लेकिन अब उसी काम को पूरा करने में बार-बार परेशानी होने लगे, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
काम के चरण भूल जाना, बार-बार भ्रमित होना या पहले से सीखी हुई प्रक्रिया को करने में कठिनाई होना संज्ञानात्मक क्षमता में बदलाव से जुड़ा हो सकता है। संज्ञानात्मक क्षमता में याद रखना, समझना, ध्यान लगाना, सोच-विचार करना और निर्णय लेना जैसी दिमागी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
व्यवहार में अचानक बदलाव भी हो सकता है संकेत
मस्तिष्क की सेहत में बदलाव का असर व्यक्ति के व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। अचानक ज्यादा भ्रमित रहना, किसी बात को समझने में असामान्य कठिनाई होना या सोचने-समझने के तरीके में स्पष्ट बदलाव आना ध्यान देने योग्य हो सकता है।
परिवार के सदस्य अक्सर ऐसे बदलाव सबसे पहले नोटिस कर सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के व्यवहार में लगातार या अचानक परिवर्तन दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने पर विचार करना चाहिए।
कम उम्र में भी हो सकते हैं ऐसे लक्षण
ब्रेन हेल्थ से जुड़ी परेशानियों को केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं या अन्य कारणों से कम उम्र में भी याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।
खासकर अगर कम उम्र में भूलने की समस्या बार-बार हो रही है, कामकाज प्रभावित हो रहा है या व्यवहार में स्पष्ट बदलाव नजर आ रहे हैं, तो विशेषज्ञ से जांच कराना उचित है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर याददाश्त या सोचने-समझने से जुड़ी समस्या लगातार बढ़ रही है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या परिवार के लोग आपके व्यवहार और क्षमताओं में स्पष्ट बदलाव महसूस कर रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसे लक्षणों के कई संभावित कारण हो सकते हैं और केवल लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है।

