EPF Withdrawal New Rules 2026: EPFO ने पीएफ निकासी के नियम आसान किए हैं। अब 3 कैटेगरी में 75% तक एडवांस निकाल सकेंगे, 25% बैलेंस रखना होगा।
EPF Partial Withdrawal New Rules 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए पीएफ से जुड़ी अहम खबर है। अब कर्मचारी अपने ईपीएफ खाते से आंशिक निकासी यानी एडवांस लेने के लिए पहले की तरह कई अलग-अलग नियमों में उलझने के बजाय तीन प्रमुख श्रेणियों के तहत आवेदन कर सकेंगे।
नए प्रावधानों के मुताबिक, पात्र सदस्य अपने ईपीएफ खाते में मौजूद कुल बैलेंस का अधिकतम 75 फीसदी तक एडवांस के तौर पर निकाल सकते हैं। वहीं कम से कम 25 फीसदी रकम खाते में बनाए रखना जरूरी होगा। इस बदलाव का उद्देश्य पीएफ निकासी की प्रक्रिया को सरल बनाना और जरूरत के समय सदस्यों को आसानी से फंड उपलब्ध कराना है।
EPFO ने एडवांस निकासी को 3 कैटेगरी में बांटा
नए नियमों के तहत अलग-अलग जरूरतों के लिए उपलब्ध पीएफ एडवांस की सुविधाओं को तीन मुख्य श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इससे सदस्यों के लिए यह समझना आसान होगा कि किस स्थिति में कितनी बार पीएफ से रकम निकाली जा सकती है।
1. जरूरी जरूरतों के लिए निकासी
पहली श्रेणी में स्वास्थ्य, शिक्षा और शादी जैसी आवश्यक जरूरतों को शामिल किया गया है।
- बीमारी: सदस्य खुद या परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए जरूरत के मुताबिक कितनी भी बार एडवांस ले सकता है।
- शिक्षा: पूरी ईपीएफ सदस्यता अवधि के दौरान शिक्षा से जुड़ी जरूरत के लिए अधिकतम 10 बार आंशिक निकासी की अनुमति है।
- विवाह: शादी के लिए सदस्य पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार पीएफ एडवांस ले सकता है।
2. घर और प्रॉपर्टी से जुड़ी जरूरतों के लिए नियम
दूसरी श्रेणी में आवास से संबंधित खर्चों को रखा गया है। इसमें घर या फ्लैट खरीदना, प्लॉट खरीदना, मकान बनाना, होम लोन चुकाना और घर की मरम्मत या सुधार जैसे उद्देश्य शामिल हैं। इन सभी आवास संबंधी जरूरतों के लिए पूरी सदस्यता अवधि में कुल मिलाकर अधिकतम 5 बार पीएफ एडवांस लेने की अनुमति होगी।
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3. विशेष परिस्थितियों में भी मिल सकेगा एडवांस
तीसरी श्रेणी में उन विशेष परिस्थितियों को रखा गया है जिन्हें बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। ऐसे मामलों में ईपीएफ सदस्य एक वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम 2 बार आंशिक निकासी कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का मकसद ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जिन्हें सामान्य श्रेणियों में शामिल नहीं किया गया है।
पीएफ निकालने के लिए 12 महीने की सदस्यता जरूरी
नए नियमों के तहत आंशिक निकासी का लाभ लेने के लिए सदस्य की ईपीएफ सदस्यता कम से कम 12 महीने की होनी चाहिए। यानी जिन कर्मचारियों ने ईपीएफ में एक साल की सदस्यता पूरी नहीं की है, वे इन प्रावधानों के तहत एडवांस क्लेम नहीं कर पाएंगे।
75% तक ही निकाल पाएंगे पीएफ बैलेंस
नए नियमों में सबसे अहम बदलाव पीएफ बैलेंस से जुड़ा है। पात्र सदस्य अपने कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान तथा उस पर मिले ब्याज को मिलाकर बने कुल बैलेंस का अधिकतम 75 फीसदी तक ही एडवांस के रूप में निकाल सकेंगे।
बाकी 25 फीसदी राशि खाते में सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे सदस्य के रिटायरमेंट फंड का एक हिस्सा बना रहेगा और पूरी बचत एक साथ खत्म होने की संभावना कम होगी।
क्यों बदले गए EPF Partial Withdrawal Rules?
पीएफ निकासी के पुराने सिस्टम में अलग-अलग जरूरतों के लिए कई तरह की शर्तें और प्रक्रियाएं लागू थीं। इससे सदस्यों को यह समझने में परेशानी होती थी कि किस स्थिति में कितना पैसा और कितनी बार निकाला जा सकता है।
नए तीन-श्रेणी वाले ढांचे का उद्देश्य इन प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। इससे कर्मचारियों को अपने क्लेम की पात्रता समझने में सुविधा होगी और जरूरत के समय पीएफ फंड तक पहुंच आसान हो सकती है।
कब लागू हुए नए EPFO नियम?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नए सरलीकृत ढांचे को अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की मंजूरी मिली थी। इसके बाद जुलाई 2026 से इन प्रावधानों को पूरे देश में लागू किए जाने की जानकारी दी गई है।
नए नियमों से पीएफ सदस्यों के लिए आंशिक निकासी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी क्लेम से पहले सदस्य को अपनी पात्रता और लागू शर्तों की पुष्टि आधिकारिक EPFO स्रोत से कर लेनी चाहिए।

