World Hearing Day 2025: अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 12 से 35 साल की उम्र के लगभग 4.3 करोड़ किशोर और युवा कम सुनाई देने की समस्या से जूझ रहे हैं।स्मार्टफोन और म्यूजिक प्लेयर के कारण इनमें से लगभग 50% इसका शिकार बने हैं।
World Hearing Day 2025: 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को बहरेपन से बचाना है। स्मार्टफोन, हेडफोन-ईयरफोन, हाई पावर म्यूजिक सिस्टम और नवीनतम टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से युवा तेजी से बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। WHO की एक रिपोर्ट दो साल पहले आई है कि 12 से 35 साल की उम्र के करीब 4.3 करोड़ किशोर और युवा कम सुनाई देने की समस्या से जूझ रहे हैं।
यदि ऐसा ही चलता रहा तो 2050 तक चार में से एक की सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है। बहरेपन (Deafness) का कोई इलाज नहीं है। बचाव ही इसका उपाय है। अब हियरिंग लॉस से बचने के पांच सबसे आसान तरीके और आसपास की चीजें बहरा बनाने के लिए क्या कर सकते हैं।
बहरेपन की वजह
1. लंबे समय तक तेज आवाज में सुनना।
2. ध्वनि प्रदूषण हमारी सुनने की क्षमता पर प्रभाव डाल सकता है। ट्रेफिक शोरगुल, फैक्ट्रियों की आवाजें, भारी ध्वनि या अन्य बातें
3. बहुत ज्यादा ऊंचा स्वर सुनना
4. फोन और कंप्यूटर के शोर भी आवाज सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
5. शोरगुल वाला माहौल
6. हमारी सुनने की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ-साथ प्रभावित हो सकती है। धीरे-धीरे हमारी सुनने की क्षमता कम होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
आकाश हेल्थकेयर के ENT सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अभिनीत शर्मा ने बताया कि हियरिंग लॉस का सबसे बड़ा कारण युवाओं का लंबे समय तक हेडफोन का इस्तेमाल है, चाहे पढ़ाई हो या मनोरंजन के लिए। इसके अलावा हाई इंटेंसिटी साउंड, शादी में बजने वाले डीजे की तरह। डॉक्टर ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटिक से पीड़ित लोगों में भी कान की नसें कमजोर होने का रिस्क अधिक होता है।
हियरिंग लॉस से बचने के पांच सरल उपाय
1. ईयरफोन का कम इस्तेमाल
डॉक्टरों का कहना है कि इयरफोन या इयरबड्स से निकली ध्वनि की तरंगें हमारे कानों तक पहुंचती हैं, जिससे कान के परदे में कंपन उत्पन्न होता है। यह कंपन कान के आंतरिक भाग में होने वाले कॉक्लिया तक पहुंचता है। सुनना महत्वपूर्ण है। इससे हियरिंग सेल्स प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि ईयरफोन-इयरबड्स का इस्तेमाल कम करें और कम शोर रखें।
2. शोर से बचें
60-80 डेसीबल में ट्रैफिक शोर, अलार्म घड़ी, वॉशिंग मशीन और आम बातचीत आते हैं। कम से कम आठ घंटे तक 85 डेसिबल से कम आवाज सुनना सुरक्षित है। बाइक या ट्रक की आवाज को एक दूरी पर रखा म्यूजिक सिस्टम 95 से 100 डिसेबिल में रिकॉर्ड कर सकता है। इनसे दूर रहें।
3. अपने मोबाइल फोन पर बहुत बात न करें
मोबाइल फोन पर बात करने या गाने सुनने के लिए 60–60 के नियम का पालन करना चाहिए। दिन में एक घंटे से अधिक समय तक मोबाइल फोन कान पर नहीं रखें। इसकी अधिकतम तीव्रता 60 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
4. स्वस्थ भोजन करें
खानपान में जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड शामिल करें। मैग्नीशियम तेज शोर और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से कान की संवेदी कोशिकाओं को बचाता है। पोटैशियम कान के आंतरिक भाग में मौजूद द्रव्य को संतुलित रखने में मदद करता है। ज़िंक शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाता है, जिससे कान में इंफेक्शन और सीटी की आवाजों को बढ़ने से रोका जा सकता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, दूसरी ओर, उम्र से जुड़े बहरेपन को कम करने में हेल्दी फैट का काम करता है।
5. धूम्रपान नहीं करें
धूम्रपान भी बहरनेपन का कारण हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है, जो परिसंचरण तंत्र से होती है। इसके अतिरिक्त, कान में रुई नहीं डालें। सफ़ाई करने या खुजली होने पर कान में ईयरबड, चाबी या कोई अन्य चीज डालने से बचें।
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