सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा में चंद्रदेव की तपस्या और शिव कृपा से इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जानें इसका दिव्य इतिहास।
भारत की आध्यात्मिक और धार्मिक परंपरा में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थान अत्यंत पवित्र और दिव्य माना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित प्रभास पाटन में यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रथम माना जाता है। इसकी महिमा सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है।
सोमनाथ अमृत पर्व 2026 के अवसर पर इस पवित्र धाम का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और दिव्य ऊर्जा का जीवंत प्रतीक है।
कैसे हुई सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना
पौराणिक कथाओं के अनुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव द्वारा की गई थी। “सोमनाथ” शब्द का अर्थ है चंद्रमा के स्वामी भगवान शिव।
कथा के अनुसार चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे वरदान मांगा कि वे इसी स्थान पर सदैव निवास करें। भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर ज्योति स्वरूप में यहां वास किया। तभी से यह स्थान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
चंद्रदेव और दक्ष प्रजापति की कथा
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा चंद्रदेव और दक्ष प्रजापति की है। चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों से विवाह किया था, जिन्हें 27 नक्षत्रों का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन चंद्रदेव का अधिक प्रेम रोहिणी के प्रति होने के कारण अन्य पत्नियां दुखी हो गईं। इससे क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को श्राप दिया कि उनका तेज धीरे-धीरे क्षीण हो जाएगा।
इस श्राप के कारण चंद्रमा कमजोर होने लगे और उनका तेज घटने लगा।
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भगवान शिव की कृपा से मिला पुनर्जन्म
श्राप से पीड़ित होकर चंद्रदेव ब्रह्मदेव की सलाह पर प्रभास क्षेत्र पहुंचे और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे हर माह घटेंगे और बढ़ेंगे, लेकिन पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होंगे। इसी कारण आज भी चंद्रमा का शुक्ल और कृष्ण पक्ष स्वरूप दिखाई देता है।
क्यों माना जाता है सोमनाथ को प्रथम ज्योतिर्लिंग
मान्यता है कि चंद्रदेव द्वारा स्थापित और भगवान शिव द्वारा स्वीकार किया गया यह स्थान ही प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुआ। इसलिए इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला स्थान दिया गया है।
यहां दर्शन करने मात्र से भक्तों के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग आज भी आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बना हुआ है, जो हर युग में भक्तों को दिव्य अनुभव और शांति प्रदान करता है।

