फूड कमिश्नर तुकाराम मुंडे की सख्त कार्रवाई से महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा अभियान चर्चा में है। रेस्टोरेंट छापों, कोर्ट की टिप्पणियों और सोशल मीडिया लोकप्रियता की पूरी कहानी जानें।
महाराष्ट्र में इन दिनों खाद्य सुरक्षा को लेकर एक सरकारी अधिकारी की सख्त कार्रवाई खूब चर्चा में है। महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम मुंडे लगातार रेस्टोरेंट, कैफे और खाद्य कारोबारों का निरीक्षण कर रहे हैं। उनकी कार्रवाई से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
51 वर्षीय तुकाराम मुंडे की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंस्टाग्राम पर उनके 38 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलने पर की जा रही कार्रवाई को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन भी मिल रहा है।
प्रतिष्ठित क्लब की रसोई में मिली गंदगी
मुंबई के एक सदस्यता वाले प्रतिष्ठित क्लब की रसोई की तस्वीरें सामने आने के बाद मामला खासा चर्चा में आ गया। निरीक्षण के दौरान वहां फर्श पर कॉकरोच, दीवारों पर मकड़ी के जाले और कई जगह खराब सब्जियां मिलीं।
खाद्य काउंटरों के आसपास भी कीड़े-मकौड़ों के संक्रमण के संकेत पाए गए। खास बात यह रही कि यह कोई छोटा स्थानीय भोजनालय नहीं, बल्कि मुंबई का एक जाना-पहचाना क्लब था। तस्वीरें सामने आने के बाद खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर बहस तेज हो गई।
मई से तेज हुआ खाद्य सुरक्षा अभियान
तुकाराम मुंडे ने मई में महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर का पद संभाला था। इसके बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA ने राज्य में खाद्य कारोबारों की जांच का अभियान तेज किया।
रेस्टोरेंट और कैफे से लेकर दूसरे खाद्य प्रतिष्ठानों तक बड़े स्तर पर निरीक्षण किए गए। विभाग का कहना है कि जहां खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां नियमानुसार कार्रवाई की गई।
बड़े कारोबार भी कार्रवाई से बाहर नहीं
तुकाराम मुंडे का रुख साफ है कि खाद्य सुरक्षा कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। कारोबार छोटा हो या बड़ा और उसका मालिक कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी अभियान के तहत कुछ क्विक-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस के लाइसेंस निलंबित किए गए। वहीं, प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार से जुड़े मामलों में कुछ बॉलीवुड हस्तियों को नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कार्रवाई
मुंडे के अभियान की सबसे खास बात यह है कि निरीक्षण और कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें तथा वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंच रहे हैं। इससे आम लोगों को खाद्य प्रतिष्ठानों की वास्तविक स्थिति और खाद्य सुरक्षा नियमों के महत्व के बारे में जानकारी मिल रही है।
कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया जरूरी कदम बता रहे हैं। हालांकि, कार्रवाई के तरीके को लेकर कारोबारियों की ओर से सवाल भी उठाए गए हैं।
होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों में नाराजगी
खाद्य विभाग की सख्ती से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग का एक वर्ग खुश नहीं है। कुछ कारोबारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के कानूनी चेयरमैन निरंजन लक्ष्मण शेट्टी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे या आसानी से सुधारे जा सकने वाले उल्लंघनों पर तुरंत लाइसेंस निलंबित करना और कारोबारी का नाम सार्वजनिक करना चिंता का विषय हो सकता है।
अदालत में भी पहुंची खाद्य विभाग की कार्रवाई
मुंडे के विभाग की कुछ कार्रवाइयों को कारोबारियों ने अदालत में चुनौती दी। कुछ मामलों में अदालतों ने लाइसेंस निलंबन के फैसलों को रद्द किया और कारोबारियों को राहत दी।
अदालतों की ओर से कुछ मामलों में नियामक के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। इससे खाद्य सुरक्षा नियमों के सख्त पालन और कारोबारियों के कानूनी अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
मिठाई की दुकान को मिला 5 लाख रुपये का मुआवजा
अगस्त में बॉम्बे हाई कोर्ट से जुड़े एक मामले में मुंडे के विभाग को एक मिठाई की दुकान को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोबारा निरीक्षण के दौरान दुकान करीब 98 फीसदी तक नियमों के अनुरूप पाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद लाइसेंस निलंबित रहा। अदालत ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की मंशा को सकारात्मक माना, लेकिन कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा कठोर बताया।
हाई कोर्ट की कैंटीन में भी पहुंची टीम
अदालत की टिप्पणी के बाद यह सवाल उठा कि क्या सरकारी प्रतिष्ठानों में भी इसी तरह खाद्य सुरक्षा की जांच की जाती है। इसके बाद मुंडे की टीम ने हाई कोर्ट परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया।
इस दौरान वहां भी खाद्य सुरक्षा से संबंधित कुछ कमियां चिह्नित की गईं। मुंडे के लिए यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि नियम किसी एक वर्ग या निजी कारोबार तक सीमित नहीं होने चाहिए।
बोले- हमारा मकसद कारोबार बंद करना नहीं
तुकाराम मुंडे का कहना है कि खाद्य विभाग का उद्देश्य कारोबारियों का काम बंद करवाना नहीं है। उनका प्राथमिक लक्ष्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है।
उनके मुताबिक कार्रवाई तभी की जाती है, जब खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन सामने आता है। विभाग का जोर सुरक्षित भोजन, मिलावट पर रोक और सही ब्रांडिंग सुनिश्चित करने पर है।
अखबार में खाना पैक करने पर भी सख्ती
खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत सिर्फ रेस्टोरेंट की रसोई तक ध्यान सीमित नहीं रखा गया है। खाने को अखबार में पैक करने की प्रथा पर भी रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा कुछ सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल और प्रतिबंधित या गलत तरीके से तैयार किए गए पनीर जैसे उत्पादों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया है।
स्कूल कैंटीन पर भी विभाग की नजर
अब खाद्य सुरक्षा अभियान का दायरा स्कूलों तक पहुंच गया है। विभाग ने स्कूल कैंटीन, हॉस्टल की रसोई और मिड-डे मील से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं को जरूरी लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही स्कूलों के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर भी सख्ती की गई है, जिनमें अधिक वसा, नमक या चीनी होती है।
छोटे दुकानदारों पर भी दिख रहा असर
मुंडे के अभियान का प्रभाव छोटे खाद्य कारोबारियों के कामकाज पर भी दिखाई दे रहा है। मुंबई के उपनगर में सैंडविच बेचने वाले युवराज यादव ने बताया कि वह पहले सैंडविच को पुराने अखबार में पैक करता था।
अब अखबार की स्याही में मौजूद रसायनों के भोजन में जाने की आशंका को देखते हुए उसने ग्रीसप्रूफ पेपर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे पता चलता है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी मुहिम का असर बड़े रेस्टोरेंट से लेकर छोटे स्ट्रीट फूड कारोबारियों तक पहुंच रहा है।
क्या मुंडे के बाद भी जारी रहेगा अभियान?
तुकाराम मुंडे की सख्त कार्यशैली ने खाद्य सुरक्षा को लेकर लोगों का ध्यान जरूर खींचा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उनके अगले पद पर जाने के बाद भी यह अभियान इसी रफ्तार से जारी रहेगा या नहीं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा के लिए किसी एक अधिकारी की सक्रियता से ज्यादा जरूरी ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है, जो अधिकारी के बदलने के बाद भी लगातार और निष्पक्ष तरीके से काम करती रहे।

