Tata Power Share Price: टाटा पावर शेयर 4% टूटा, सिंगापुर कोर्ट के फैसले से ₹4,700 करोड़ के आर्बिट्रेशन मामले में झटका लगा। जानें पूरा विवाद और शेयर पर असर।
Tata Power Share Price: टाटा ग्रुप की पावर कंपनी टाटा पावर के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। सिंगापुर की अदालत से कंपनी को करीब ₹4,700 करोड़ के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड मामले में राहत नहीं मिलने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कारोबार के दौरान टाटा पावर का शेयर 4% से ज्यादा टूटकर सात महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया।
बीएसई पर शेयर करीब 4.15% की गिरावट के साथ ₹350.20 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि इंट्रा-डे में यह 4.69% गिरकर ₹348.20 तक पहुंच गया। इस गिरावट के साथ टाटा पावर निफ्टी 500 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहा।
1. क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब एक दशक पुराना है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी, जब क्लेरोस और टाटा पावर ने रूस में एक कोयला खदान के लिए संयुक्त रूप से बोली लगाने की संभावना पर काम शुरू किया था।
क्लेरोस के अनुमान के मुताबिक, संबंधित परियोजना में करीब 110 करोड़ डॉलर मूल्य का कोयला भंडार मौजूद था। सितंबर 2013 में दोनों कंपनियों के बीच नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट यानी NDA भी हुआ था।
2. साझेदारी में कैसे आया विवाद?
2015 तक दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित बोली की अगुवाई और परियोजना के स्वामित्व ढांचे को लेकर मतभेद सामने आने लगे। बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और 2016 में दोनों पक्षों की साझेदारी समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों कंपनियों के बीच विवाद की स्थिति और गहरी होती गई।
3. रूस की कोयला खदान से जुड़ा क्या घटनाक्रम रहा?
दिसंबर 2017 में क्लेरोस ने रूस में हुई केंद्रीय नीलामी में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। इसके बाद कंपनी ने रूस में अपना कारोबार भी बंद कर दिया।
दूसरी ओर, टाटा पावर ने अपनी रूसी सब्सिडियरी के जरिए उसी कोयला खदान के लिए बाद में बोली लगाई। कंपनी की ओर से यह बोली NDA की अवधि समाप्त होने के बाद लगाई गई थी।
टाटा पावर को परियोजना का माइनिंग लाइसेंस भी मिल गया था। हालांकि, बाद में कंपनी ने परियोजना को व्यावसायिक रूप से आकर्षक नहीं पाया और लाइसेंस वापस कर दिया।
4. क्लेरोस ने टाटा पावर पर क्या आरोप लगाया?
विवाद ने 2020 में कानूनी रूप ले लिया। क्लेरोस ने टाटा पावर के खिलाफ आर्बिट्रेशन प्रक्रिया शुरू की। क्लेरोस का आरोप था कि टाटा पावर ने साझेदारी के दौरान साझा की गई गोपनीय जानकारी का अनुचित इस्तेमाल किया और उसे परियोजना से बाहर रखने के लिए गलत तरीके अपनाए। टाटा पावर ने इन आरोपों का विरोध किया था।
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5. आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल का फैसला क्या रहा?
आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने क्लेरोस के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके तहत टाटा पावर को करीब 49 करोड़ डॉलर, यानी लगभग ₹4,700 करोड़ का हर्जाना देने का आदेश दिया गया।
यह फैसला कंपनी के लिए बड़ा वित्तीय जोखिम बनकर सामने आया और बाद में टाटा पावर ने इसे अदालत में चुनौती देने का फैसला किया।
6. सिंगापुर की अदालत में क्या हुआ?
2025 में टाटा पावर ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को सिंगापुर की अदालत में चुनौती दी। कंपनी ने हर्जाने की रकम के साथ-साथ बहुमत से दिए गए फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट से कंपनी को राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसी खबर के बाद शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली।
7. अब टाटा पावर के पास क्या विकल्प है?
कंपनी इस मामले को आगे चुनौती देने की तैयारी में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टाटा पावर के पास फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 28 दिनों का समय है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के फैसले इस मामले की अंतिम दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
8. निवेशकों की नजर अब किस पर है?
₹4,700 करोड़ के संभावित वित्तीय असर के कारण निवेशक अब कंपनी के अगले कानूनी कदम और इस मामले से जुड़े संभावित भुगतान पर नजर रखेंगे। इसके अलावा कंपनी के मौजूदा कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजनाएं भी शेयर की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
9. एक साल में कैसा रहा Tata Power Share का प्रदर्शन?
टाटा पावर के शेयर ने पिछले एक साल में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। 27 जनवरी 2026 को शेयर ₹342.35 के स्तर तक पहुंच गया था, जिसे उस समय एक साल का निचला स्तर बताया गया।
इसके बाद शेयर में मजबूत रिकवरी आई और 28 अप्रैल 2026 को ₹464.80 के स्तर तक पहुंच गया, जो एक साल का उच्च स्तर रहा। हालांकि, इसके बाद शेयर पर दबाव देखने को मिला और सिंगापुर कोर्ट से जुड़ी खबर ने गिरावट को और तेज कर दिया।

