बैंक खाते में ₹23 लाख जमा होने पर आयकर नोटिस मिला, लेकिन धर्म कांटा की पर्चियों और अन्य दस्तावेजों से रकम का स्रोत साबित हुआ। ITAT ने टैक्स बढ़ोतरी हटाई।
Income Tax Notice: बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलना किसी भी टैक्सपेयर के लिए चिंता की बात हो सकती है। ऐसा ही एक मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की दिल्ली बेंच के सामने आया, जहां एक महिला के बैंक खाते में जमा ₹23 लाख को आयकर विभाग ने अघोषित आय मान लिया था। हालांकि, बाद में पेश किए गए दस्तावेजों और धर्म कांटा की तौल पर्चियों ने रकम के स्रोत को साबित करने में अहम भूमिका निभाई।
ITAT ने मामले की सुनवाई के बाद महिला टैक्सपेयर को राहत देते हुए आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत की गई ₹23 लाख की पूरी बढ़ोतरी को हटा दिया।
बैंक खाते में जमा ₹23 लाख पर उठे सवाल
आयकर विभाग ने महिला टैक्सपेयर के बैंक खाते में जमा ₹23 लाख की रकम के स्रोत पर सवाल उठाया था। विभाग ने इसे अघोषित आय मानते हुए आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत रकम को आय में जोड़ दिया।
मामला आगे बढ़ने पर आयकर आयुक्त (अपील) यानी CIT(A) ने भी विभाग की ओर से की गई इस बढ़ोतरी को बरकरार रखा। इसके बाद टैक्सपेयर ने राहत के लिए ITAT का रुख किया।
पति ने पेड़ और आम बेचकर जुटाई थी रकम
महिला की ओर से ITAT के सामने बताया गया कि ₹23 लाख की रकम उसके पति सुखपाल सिंह ने पेड़ों और आम की बिक्री से हासिल की थी। मार्च 2011 में प्राप्त इस रकम को पति ने पत्नी के बैंक खाते में जमा कराया था।
परिवार के अनुसार, इस पैसे को बेटी की शादी के लिए सुरक्षित रखा गया था। बेटी की शादी वर्ष 2013 में हुई थी। मामले में पति की ओर से हलफनामा भी दाखिल किया गया, जिसमें उन्होंने रकम पर अपना अधिकार स्वीकार किया।
धर्म कांटा की पर्चियों ने साबित किया रकम का स्रोत
मामले में सबसे अहम सबूतों में धर्म कांटा की तौल पर्चियां शामिल रहीं। इन दस्तावेजों में पेड़ों और आम की बिक्री से संबंधित वजन, कीमत और भुगतान की जानकारी दर्ज थी।
इसके अलावा टैक्सपेयर ने खरीदारों के हलफनामे, कृषि भूमि के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड, बैंक से संबंधित दस्तावेज और पेड़ों व कृषि गतिविधियों से जुड़े जियो-टैग्ड सबूत भी प्रस्तुत किए।
इन सभी दस्तावेजों को मिलाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि बैंक खाते में जमा रकम किसी अज्ञात स्रोत से नहीं आई थी, बल्कि कृषि भूमि पर मौजूद पेड़ों और आम की बिक्री से प्राप्त हुई थी।
also read: अन्नू प्रोजेक्ट्स IPO: तीसरे दिन 54% सब्सक्रिप्शन, GMP ₹4, लिस्टिंग गेन क…
ITAT ने साक्ष्यों पर जताया भरोसा
ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद माना कि महिला टैक्सपेयर बैंक खाते में जमा रकम के स्रोत को पर्याप्त रूप से समझाने में सफल रही।
ITAT के अनुसार, रिकॉर्ड से यह स्थापित होता है कि 9 अप्रैल 2011 को बैंक खाते में जमा ₹23 लाख की राशि मार्च 2011 में पेड़ों और आम की बिक्री से प्राप्त रकम से जुड़ी थी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी देखा कि CIT(A) के समक्ष कुछ अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन उनकी पुष्टि के लिए रिमांड रिपोर्ट नहीं मंगाई गई। इसके बावजूद आयकर विभाग की ओर से की गई पूरी बढ़ोतरी को बरकरार रखा गया था।
₹23 लाख की पूरी टैक्स बढ़ोतरी हुई खत्म
सभी परिस्थितियों और उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए ITAT ने माना कि रकम का स्रोत स्पष्ट हो चुका है। इसलिए आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत ₹23 लाख को अघोषित आय मानकर की गई बढ़ोतरी को हटाने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद महिला टैक्सपेयर को ₹23 लाख की पूरी आयकर बढ़ोतरी से राहत मिल गई।
इस मामले से टैक्सपेयर्स को क्या सीख मिलती है?
यह मामला दिखाता है कि बैंक खाते में जमा बड़ी रकम के स्रोत को साबित करने के लिए सही दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जमीन, बिक्री, बैंक लेनदेन और आय के स्रोत से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखना टैक्स विवाद की स्थिति में मददगार साबित हो सकता है।
हालांकि, हर आयकर मामला अपने तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होता है। इसलिए किसी नोटिस या टैक्स विवाद की स्थिति में योग्य टैक्स विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेना उचित है।

