खेलो इंडिया डायलॉग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा एथलीटों से संवाद किया। उन्होंने 2036 ओलंपिक की तैयारी, टैलेंट हंट, आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम और युवा शक्ति पर भरोसे की बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से आयोजित ‘खेलो इंडिया डायलॉग- खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ कार्यक्रम में देशभर के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खेलों को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े सभी लोगों, केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों और ‘माय भारत’ के स्वयंसेवकों को बधाई दी। उन्होंने युवाओं की क्षमता पर विश्वास जताते हुए कहा कि भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति मिलकर देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
मेजर ध्यानचंद को पीएम मोदी ने किया याद
राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले प्रधानमंत्री ने महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने करीब एक सदी पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे का उल्लेख किया, जिसमें मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे।
पीएम मोदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की शुरुआती कड़ियों में से एक था। उन्होंने न्यूजीलैंड की अपनी हालिया यात्रा के दौरान भी मेजर ध्यानचंद को याद करने की बात कही।
खेल का मतलब सिर्फ मेडल जीतना नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को केवल पदक हासिल करने की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, संघर्ष करने की क्षमता और हार के बाद दोबारा खड़े होने का जज्बा पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘जो खेले, वो खिले’ का अर्थ सिर्फ मैदान पर जीत हासिल करना नहीं है। किसी खिलाड़ी की सफलता उसके परिवार, स्कूल, जिले और राज्य का गौरव भी बढ़ाती है। एक सफल खिलाड़ी अपने क्षेत्र को देश और दुनिया में पहचान दिला सकता है।
ओलंपिक में ज्यादा खेलों में भागीदारी की जरूरत
पीएम मोदी ने ओलंपिक में भारत की सीमित भागीदारी को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे खेल हैं जिनमें भारत अभी पर्याप्त रूप से हिस्सा नहीं लेता।
उन्होंने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियां और बड़ी युवा आबादी है, जिनका इस्तेमाल नए खेलों को बढ़ावा देने में किया जा सकता है। उन्होंने जिलों के स्तर पर ऐसे खेलों की पहचान करने की जरूरत बताई, जिनमें स्थानीय युवाओं के पास प्रतिभा और बेहतर प्रदर्शन की संभावना है।
2036 ओलंपिक के लिए आज से शुरू होगी तैयारी
प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों को लेकर भी अपनी सरकार की योजना पर बात की। उन्होंने कहा कि जिन खिलाड़ियों को 2036 में भारत का प्रतिनिधित्व करना है, उनकी खोज और तैयारी अभी से शुरू करनी होगी।
उन्होंने बताया कि 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा तलाशने के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट अभियान पर जोर दिया जाएगा। इसमें बच्चों की केवल खेलों में रुचि नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता और संबंधित खेल के लिए उपयुक्तता को भी ध्यान में रखा जाएगा।
also read: रूस में पेट्रोल की किल्लत! यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बीच भारत से मंगाया जा…
आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी के अनुरूप आधुनिक खेल व्यवस्था तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रों और प्रतिभा पहचान की व्यवस्थाओं के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे देशों के साथ खेल सहयोग को मजबूत किया जा रहा है, ताकि भारतीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिल सके।
युवाओं के सुझावों को नीति से जोड़ने की पहल
प्रधानमंत्री ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ को केवल संवाद का कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की सोच और देश की खेल नीति के बीच एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
उन्होंने कहा कि खेल व्यवस्था, प्रतिभा विकास, प्रशासन और विकसित भारत से जुड़े विषयों पर युवाओं के विचार सुने जाएंगे। इन सुझावों को जरूरत के अनुसार नीतियों और योजनाओं में शामिल करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पैरा एथलीटों की उपलब्धियों का किया जिक्र
खेलों से मिलने वाली प्रेरणा की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को उदाहरण के तौर पर सामने रखा। उन्होंने शीतल देवी, अवनी लेखरा, सुमित अंतिल और नितेश कुमार समेत कई खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने कहा कि इन खिलाड़ियों की सफलता यह दिखाती है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने फौजा सिंह का उदाहरण देते हुए खेल और फिटनेस को बेहतर जीवनशैली से जोड़ने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा भी दे सकते हैं।
‘प्ले ग्राउंड की अहमियत ज्यादा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में खेलों को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। आज बड़ी संख्या में लोग दौड़, योग, पिकलबॉल और बैडमिंटन जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने युवाओं को स्क्रीन टाइम कम करने और खेलों के लिए समय निकालने का संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड को महत्व दिया जाना चाहिए।
अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में, युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि खेल विज्ञान, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी और आधुनिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए करियर अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।

