हरियाणा में निपुण वाटिका पहल के जरिए सरकारी स्कूलों में बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जा रही है, जिससे पढ़ाई आसान और रुचिकर बन रही है।
हरियाणा सरकार सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रुचिकर बनाने की दिशा में लगातार नए प्रयोग कर रही है। इसी कड़ी में रोहतक जिले के गांव खरावड़ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में स्थापित “निपुण वाटिका” अब बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यहां विद्यार्थी पारंपरिक तरीके के बजाय खेल-खेल में पढ़ाई कर रहे हैं और नई गतिविधियों के माध्यम से सीखने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने निपुण वाटिका का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे प्रतिभा से भरपूर हैं और अध्यापक अपनी मेहनत से उन्हें सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की पहल ने शिक्षा को आसान, रोचक और व्यवहारिक बना दिया है।
खेल-खेल में शिक्षा का अनोखा मॉडल
निपुण वाटिका में बच्चों को पारंपरिक किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है। यहां समूह बनाना, पहाड़े सीखना, सम और विषम संख्या पहचानना, आकृतियों की जानकारी, ऊंचाई मापना, त्रिभुज, वर्ग और आयत जैसी गणितीय अवधारणाओं को खेल के रूप में समझाया जा रहा है।
इसके अलावा बच्चों को स्वर, व्यंजन, अक्षर ज्ञान, मात्राओं की पहचान और देश के मानचित्र की जानकारी भी डिजिटल माध्यम से दी जा रही है। बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है।
शिक्षा मंत्री ने निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी गतिविधियों को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।
निपुण भारत मिशन को मिल रही नई दिशा
श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि प्रदेश सरकार “निपुण भारत मिशन” के तहत प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता विकसित करें ताकि आगे की शिक्षा मजबूत आधार पर खड़ी हो सके।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें व्यवहारिक और नैतिक शिक्षा का भी समावेश होना जरूरी है। इसी सोच के तहत शिक्षकों को रचनात्मक शिक्षा पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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सुपर-40 पहल की भी सराहना
शिक्षा मंत्री ने रोहतक प्रशासन द्वारा शुरू की गई “सुपर-40” पहल की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी बच्चों को बेहतर अवसर देने के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने उपायुक्त सचिन गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार और शिक्षा विभाग की टीम की तारीफ करते हुए कहा कि इन प्रयासों से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है और बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
शिक्षा को तकनीक से जोड़ने पर जोर
निपुण वाटिका में डिजिटल माध्यम से शिक्षा देने की व्यवस्था को लेकर शिक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में तकनीक आधारित शिक्षा बेहद जरूरी हो गई है। बच्चे जितना अधिक दृश्य और गतिविधि आधारित तरीके से सीखेंगे, उतनी ही जल्दी वे चीजों को समझ पाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी विद्यालयों में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लगातार निवेश कर रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी निजी विद्यालयों जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
बच्चों की झिझक दूर करने की पहल
प्रेस प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश के हर प्रतिभाशाली बच्चे को सही दिशा और अवसर मिले। निपुण वाटिका जैसी योजनाएं बच्चों की झिझक दूर करने और उन्हें आत्मविश्वासी बनाने में मदद कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाना और उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इससे बच्चे बिना दबाव के सीखते हैं और शिक्षा उनके लिए बोझ नहीं बल्कि आनंद का विषय बन जाती है।
सरकारी स्कूलों में बदल रही शिक्षा की तस्वीर
हरियाणा सरकार की नई शिक्षा पहलें सरकारी स्कूलों को नई पहचान देने का कार्य कर रही हैं। निपुण वाटिका, डिजिटल शिक्षा, गतिविधि आधारित शिक्षण और सुपर-40 जैसी योजनाओं के कारण विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार शिक्षा में नवाचार जारी रहे तो आने वाले समय में सरकारी विद्यालय भी गुणवत्ता और परिणामों के मामले में निजी संस्थानों को चुनौती दे सकेंगे।
इस अवसर पर उपायुक्त सचिन गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी दिलजीत सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

