प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को 2029 से पहले लागू करने का भरोसा जताया, संसद सत्र बढ़ाने और सर्वदलीय समर्थन की अपील।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सरकार इसे 2029 से पहले लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून देश को महिला नेतृत्व वाले शासन की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनेगा और महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि यदि आवश्यक हुआ तो संसद के सत्र को बढ़ाकर इस कानून को जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखें और महिला सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक कदम में सहयोग करें।
सरकार द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून कहा जाता है, भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी देना भी जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के उस विचार का समर्थन किया जिसमें महिलाओं की विधायी भागीदारी और समावेशी शासन की आवश्यकता पर बल दिया गया था।
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हालांकि, इस कानून के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक है। सरकार इस प्रक्रिया से पहले कानून को लागू करने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है, जिसके लिए संविधान में अतिरिक्त संशोधन की जरूरत पड़ सकती है। इसी संदर्भ में बजट सत्र को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि आवश्यक विधायी बदलाव समय पर किए जा सकें।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह कानून बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की माताओं और बहनों के विश्वास को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे इसे राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से न देखें, बल्कि देश के भविष्य और महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से समर्थन दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून तय समयसीमा से पहले लागू होता है, तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका और प्रभाव दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि नीतिगत फैसलों में भी उनकी भागीदारी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण कानून को लेकर प्रधानमंत्री का यह बयान देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बना सकता है।

