राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ग्यानी जैल सिंह की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मंगलवार को Rashtrapati Bhavan में भारत के पूर्व राष्ट्रपति Giani Zail Singh की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उनके जीवन, संघर्ष और राष्ट्र सेवा में दिए गए योगदान को याद किया गया।
स्वतंत्रता संग्राम से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
ग्यानी जैल सिंह का जन्म 5 मई 1916 को पंजाब के फरीदकोट जिले के संधवान गांव में हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और Quit India Movement में भाग लेते हुए ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
पंजाब की राजनीति में अहम भूमिका
आजादी के बाद उन्होंने पंजाब की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई और 1972 में राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार, भूमि नीतियों में बदलाव और जनहितकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई।
केंद्रीय राजनीति में योगदान
साल 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने उन्हें देश का गृह मंत्री नियुक्त किया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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देश के सातवें राष्ट्रपति
1982 में ग्यानी जैल सिंह भारत के सातवें राष्ट्रपति बने और 25 जुलाई 1987 तक इस पद पर कार्यरत रहे। उनका कार्यकाल संविधान के प्रति निष्ठा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए जाना जाता है।
सादगी और जनसेवा की मिसाल
ग्यानी जैल सिंह अपनी सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए प्रसिद्ध थे। समाज के कमजोर वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ने उन्हें हर वर्ग में सम्मान दिलाया।
विरासत आज भी प्रेरणादायक
25 दिसंबर 1994 को उनके निधन के बावजूद, भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन में उनका योगदान आज भी प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति द्वारा दी गई यह श्रद्धांजलि देश के महान नेताओं के प्रति सम्मान और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा का प्रतीक है।

