हरियाणा विधानसभा में श्रुति चौधरी ने नारी शक्ति वंदन विधेयक पर विपक्ष के रुख को महिलाओं की भावनाओं के खिलाफ बताया।
हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ को लेकर जारी बहस के बीच सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री Shruti Chaudhary ने इस विधेयक को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए विपक्ष के रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब संसद में इस विधेयक को लाने के लिए विशेष सत्र बुलाने की खबर आई थी, तब पूरे देश में खासकर महिलाओं के बीच उत्साह और उम्मीद का माहौल था, क्योंकि उन्हें लगा था कि उनकी वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है।
मंत्री ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण विधायी निर्णयों में शामिल होता, जिससे महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता और राजनीति के साथ-साथ समाज में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलता। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान शुरू से ही प्रगतिशील रहा है, जहां महिलाओं और पुरुषों को समान मतदान अधिकार दिए गए, जबकि कई अन्य देशों में महिलाओं को यह अधिकार पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।
Narendra Modi के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना और हर घर जल जैसी पहलों ने महिलाओं के जीवन को सुरक्षित और आसान बनाया है। इसके साथ ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के प्रभाव से हरियाणा का लिंगानुपात वर्ष 2015 में 871 से बढ़कर अब 923 तक पहुंच गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
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आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए श्रुति चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए गए हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। राज्य स्तर पर भी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनमें राशन डिपो में 33 प्रतिशत आरक्षण, ‘मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना’ और ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार महिलाओं के जीवन के हर चरण में उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इन योजनाओं की निगरानी स्वयं Nayab Singh Saini कर रहे हैं, जिससे इनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।
विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह देश के भविष्य और सामाजिक संतुलन से जुड़ा विषय है। उन्होंने इसे एक ऐसा अवसर बताया, जिसके जरिए भारत दुनिया को यह संदेश दे सकता था कि वह अपनी मातृ शक्ति को नेतृत्व में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंत में श्रुति चौधरी ने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं इस मुद्दे पर अपना जवाब जरूर देंगी। उन्होंने उन सभी दलों की निंदा की जिन्होंने इस विधेयक को पारित होने से रोका और कहा कि इतिहास उन्हें इस निर्णय के लिए याद रखेगा।

