JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी ने हाईकोर्ट का रुख किया। करीब 200 उप-समाहर्ताओं की ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई है।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद चयनित अभ्यर्थियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। परीक्षा के आधार पर नियुक्त होकर डिप्टी कलेक्टर के पद पर काम कर रहीं सोनम कुमारी ने राज्य सरकार के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, इन परीक्षाओं से नियुक्त करीब 200 उप-समाहर्ताओं की ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई है।
डिप्टी कलेक्टर सोनम ने दाखिल की याचिका
सेवामुक्त की गईं सोनम कुमारी की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई है। याचिका में राज्य सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए JPSC की विज्ञापन संख्या 01/2024 से संबंधित परीक्षा को रद्द किया गया है।
सोनम कुमारी पहले हजारीबाग में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर तैनात थीं। उन्होंने JPSC परीक्षा में चयन के बाद अपनी पिछली नौकरी छोड़कर झारखंड में सेवा शुरू की थी। नियुक्ति मिलने के बाद उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले के खिलाफ कई प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत में इन याचिकाओं के जरिए नियुक्तियों पर पड़े असर और सरकार के फैसले को चुनौती दी जा रही है।
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करीब 200 उप-समाहर्ताओं की ट्रेनिंग रुकी
JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से नियुक्त करीब 200 उप-समाहर्ताओं की ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई है। इन अधिकारियों को प्रशिक्षण के अलग-अलग चरणों से गुजरना था और कुछ को जिलों में प्रोबेशन अवधि के दौरान जिम्मेदारियां भी दी गई थीं।
परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्ति की वैधता को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इसी वजह से कई अधिकारी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर भी आगे की प्रक्रिया को लेकर संशय बना हुआ है।
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। हालिया फैसले में 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द की गई हैं, जबकि अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
श्रावणी मेले की ड्यूटी से भी हटाए गए अधिकारी
इन नवनियुक्त अधिकारियों में से कई को श्रावणी मेले के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। देवघर के बाबा धाम क्षेत्र में 40 प्रोबेशनरी उप-समाहर्ताओं की तैनाती की गई थी, जबकि दुमका के बासुकीनाथ में 23 अधिकारियों को दंडाधिकारी के रूप में लगाया गया था।
इस तरह कुल 63 अधिकारी श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं में तैनात थे। परीक्षा रद्द होने के बाद इनकी ड्यूटी भी प्रभावित हुई है।
अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल
JPSC परीक्षा रद्द होने से सिर्फ मौजूदा नियुक्तियां ही प्रभावित नहीं हुई हैं, बल्कि उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सरकारी सेवा ज्वाइन की थी।
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसका असर उन उम्मीदवारों पर नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है। इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित अभ्यर्थी कानूनी रास्ता अपना रहे हैं।
सरकार ने क्यों रद्द कीं भर्ती परीक्षाएं?
झारखंड सरकार ने राज्य की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया है। यह कदम भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच उठाया गया है।
इस पूरे मामले ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था, परीक्षा की पारदर्शिता और चयनित अभ्यर्थियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब प्रभावित अधिकारियों और अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर है।

