सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज रेगुलेशन से जुड़े आईटी नियम 2023 पर केंद्र की याचिका पर सुनवाई का फैसला किया, लेकिन मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया।
सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक जानकारी के नियंत्रण को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम 2023 से जुड़े संशोधनों को रद्द करने वाले मुंबई हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने इस मामले में कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स सहित मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि बेहतर होगा कि पूरे मामले पर अंतिम निर्णय आने दिया जाए।
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सोशल मीडिया पर फेक कंटेंट पर चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फर्जी और भ्रामक जानकारी को लेकर चिंता भी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि कई मामलों में भारतीय सेना और राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े गलत संदेश तेजी से फैलाए जा रहे हैं, जो गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
मुंबई हाईकोर्ट का फैसला
इससे पहले 26 सितंबर 2024 को मुंबई हाईकोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए 2023 के संशोधनों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। अदालत का मानना था कि इन नियमों में भ्रामक जानकारी की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है।
केंद्र सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सामग्री को सेंसर करना नहीं बल्कि फेक न्यूज और गलत जानकारी को नियंत्रित करना है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग भी की थी।
क्या है विवादित प्रावधान
केंद्र सरकार ने 6 अप्रैल 2023 को आईटी नियमों में संशोधन करते हुए एक फैक्ट चेक यूनिट (FCU) बनाने का प्रावधान किया था। इस इकाई को सरकार से संबंधित फर्जी या भ्रामक जानकारी की पहचान करने का अधिकार दिया गया था।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकती है। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

