प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NITI Aayog के नए सदस्य डॉ. गोवर्धन दास से मुलाकात कर उनके वैज्ञानिक योगदान और प्रेरणादायक जीवन की प्रशंसा की।
देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में विज्ञान और शोध की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में NITI Aayog के नव नियुक्त पूर्णकालिक सदस्य Dr. Govardhan Das से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने डॉ. दास के प्रेरणादायक जीवन सफर, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में उनके योगदान की खुलकर सराहना की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि डॉ. गोवर्धन दास का जीवन संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदलते हुए समाज सेवा और वैज्ञानिक शोध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. दास का अनुभव और विशेषज्ञता भारत की नीति-निर्माण प्रणाली को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डॉ. गोवर्धन दास वर्तमान में IISER Bhopal के निदेशक भी हैं और पिछले लगभग तीन दशकों से इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोगों और सेल बायोलॉजी के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनके NITI Aayog में शामिल होने को विशेषज्ञ भारत की विकास योजनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और सशक्त बनाने के रूप में देख रहे हैं।
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कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार साझा करते हुए डॉ. दास ने इस नियुक्ति को अपने लिए सम्मानजनक बताते हुए कहा कि यह अवसर उन्हें देश के समग्र विकास में योगदान देने का मौका देता है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य नीति निर्माण को अधिक समावेशी और वैज्ञानिक बनाना है, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का समर्थन करते हुए कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य और नीति निर्माण के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। इस संदर्भ में NITI Aayog को उन्होंने एक मजबूत प्लेटफॉर्म बताया, जो देश की दीर्घकालिक रणनीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य नव नियुक्त सदस्यों को भी बधाई देते हुए कहा कि डॉ. गोवर्धन दास जैसे विशेषज्ञों की भागीदारी से NITI Aayog की क्षमता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आने वाले समय में भारत की विकास यात्रा में विज्ञान और अनुसंधान की भूमिका निर्णायक साबित होगी, जिससे देश वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।

