हरियाणा में गेहूं खरीद सुचारु, 39.65 लाख मीट्रिक टन आवक और 188 करोड़ का भुगतान, सीएम सैनी ने पिपली मंडी का किया निरीक्षण।
हरियाणा में रबी सीजन 2026-27 के तहत गेहूं खरीद प्रक्रिया तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और प्रदेश की सभी मंडियों तथा खरीद केंद्रों में व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है। इसी कड़ी में नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र स्थित पिपली अनाज मंडी का दौरा कर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से लेकर किसानों तक से बातचीत कर यह सुनिश्चित किया कि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके।
मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान मंडी में गेट पास प्रणाली, खरीद केंद्रों की कार्यप्रणाली और किसानों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार किसानों की फसल के एक-एक दाने की खरीद के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी किसान को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 12 अप्रैल तक राज्य में लगभग 39.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि 2.44 लाख किसानों का 30.90 लाख मीट्रिक टन फसल के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा चुका है। इसके साथ ही 10.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है और करीब 188 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।
राज्य में गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 416 मंडियों और खरीद केंद्रों के अलावा 264 अतिरिक्त खरीद स्थल भी स्थापित किए गए हैं, जिससे भीड़ कम हो और खरीद प्रक्रिया तेज गति से पूरी हो सके।
सरकार ने खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार भी लागू किए हैं। तीन-स्तरीय फसल सत्यापन प्रणाली के तहत किसानों द्वारा पंजीकृत फसल और मंडी में लाई गई फसल का मिलान किया जा रहा है, जिससे अनियमितताओं पर रोक लग रही है। इसके अलावा बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्डिंग और निगरानी जैसे उपाय भी लागू किए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन गई है।
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मुख्यमंत्री ने बेमौसमी बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद, हिसार, सिरसा और कुरुक्षेत्र जिलों के कुछ गांवों में नुकसान की रिपोर्ट सामने आई है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया है, जहां किसान 15 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नुकसान झेल रहे किसानों को समय पर राहत मिल सके।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखें तथा किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर सुविधाएं, समय पर भुगतान और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में इस बार की खरीद व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत है, जिससे किसानों का भरोसा बढ़ा है। राज्य सरकार की यह पहल न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है।

