कुरुक्षेत्र में बैसाखी महोत्सव 2026 में सीएम सैनी ने गुरु परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात कही।
हरियाणा में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित बैसाखी महोत्सव 2026 के राज्य स्तरीय समारोह में नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार गुरु साहिबानों के सिद्धांतों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कुरुक्षेत्र के केडीबी मेला ग्राउंड में आयोजित इस भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि गुरु परंपरा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली प्रेरणा है, जिसे संरक्षित और प्रसारित करना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिख इतिहास और राज्य सरकार की योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने महिला और पुरुष दंगल प्रतियोगिताओं की शुरुआत की तथा अंतरराष्ट्रीय पतंग प्रतियोगिता का शुभारंभ भी किया। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हुए ‘हरियाणा विरासत पवेलियन’ का निरीक्षण भी किया गया, जिसमें प्रदेश की परंपराओं और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
मुख्यमंत्री ने बैसाखी के पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए खालसा पंथ की स्थापना दिवस पर महान गुरुओं को नमन किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की गई थी, जिसने समाज में समानता, साहस और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता और मानवता की सेवा जैसे मूल्यों को अपनाकर ही हम एक मजबूत और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 5 मई को कुरुक्षेत्र से श्रद्धालुओं के लिए श्री नांदेड़ साहिब के दर्शन हेतु विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। इससे पहले भी अयोध्या धाम के लिए श्रद्धालुओं को भेजा जा चुका है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में सिख विरासत के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि दिसंबर 2022 में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति का गठन किया गया, जिससे सिख समुदाय को प्रशासनिक स्वायत्तता मिली है। इसके अलावा गुरु नानक देव, गुरु गोबिंद सिंह और गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्वों और शहीदी दिवसों को राज्य स्तर पर भव्य रूप से मनाया गया है।
also read : हरियाणा में गेहूं खरीद तेज: सीएम नायब सिंह सैनी ने पिपली मंडी का किया निरीक्षण, किसानों को 188 करोड़ का भुगतान
उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र के उमरी क्षेत्र में 5 एकड़ भूमि पर सिख संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 124 करोड़ रुपये के कार्यों का टेंडर जारी किया जा चुका है। यह संग्रहालय सिख इतिहास, संस्कृति और गुरुओं के योगदान को दर्शाने वाला प्रदेश का पहला बड़ा केंद्र होगा। इसके अलावा यमुनानगर में गुरु तेग बहादुर के नाम पर वन और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने 1984 के दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस कठिन समय में प्रभावित हुए 121 परिवारों को सरकार ने रोजगार प्रदान किया है, जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
कार्यक्रम में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भी बैसाखी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व न केवल नई फसल के स्वागत का प्रतीक है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और सामाजिक समरसता का संदेश भी देता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की पहल को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा सरकार द्वारा सांस्कृतिक विरासत और विकास परियोजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की यह रणनीति राज्य को सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से सशक्त बनाएगी। बैसाखी महोत्सव 2026 का यह आयोजन न केवल परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का भी सशक्त प्रयास साबित हुआ।

