हरियाणा सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को पांच वर्षों तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देगी, साथ ही विशेष मंडियां और प्रमाणन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल करते हुए किसानों के लिए नई सहायता योजना की घोषणा की है। राज्य सरकार अब प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को लगातार पांच वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10 हजार रुपये का अनुदान देगी। सरकार का मानना है कि यह कदम खेती को रसायन मुक्त बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और लोगों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है क्योंकि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो चुके हैं और बाजार में जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
पांच वर्षों तक मिलेगा आर्थिक सहयोग
सरकार की नई योजना के तहत जो किसान प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाएंगे उन्हें पांच साल तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। प्रति एकड़ 10 हजार रुपये का यह अनुदान किसानों को खेती की नई पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती वर्षों में जैविक खेती की ओर बढ़ने वाले किसानों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा दी जा रही यह सहायता किसानों के लिए राहत साबित हो सकती है।
प्रमाणन को बनाया गया अनिवार्य
सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए उपज का प्रमाणन अनिवार्य किया है। इसके लिए किसानों को अपनी उपज का प्रमाणन एपीडा से करवाना होगा।
सरकार का कहना है कि प्रमाणन से उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी, जिससे किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रमाणित जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भविष्य में यह किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकता है।
कृषि विभाग की भूमि पर होगी दीर्घकालिक जैविक खेती
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ भूमि को भी इस योजना के तहत शामिल किया जाएगा।
यह भूमि केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो कम से कम 10 वर्षों तक प्राकृतिक या जैविक खेती करने के लिए तैयार होंगे।
सरकार का मानना है कि इससे राज्य में दीर्घकालिक स्तर पर जैविक खेती का मजबूत ढांचा तैयार होगा और खेती की नई संस्कृति विकसित होगी।
किसानों को नहीं लगाने पड़ेंगे बाहरी एजेंसियों के चक्कर
राज्य सरकार किसानों की सुविधा के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी काम कर रही है।
इसके तहत हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक खेती प्रमाणन के लिए अधिकृत संस्था बनाया जाएगा।
इस व्यवस्था से किसानों को बाहरी एजेंसियों के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा खर्च दोनों की बचत होगी।
विशेष मंडियों की होगी व्यवस्था
सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष मंडियों की व्यवस्था करने का भी फैसला लिया है।
पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल सहित कई जिलों में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अलग स्थान उपलब्ध करवाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अलग मंडियां बनने से जैविक उत्पादों को पहचान मिलेगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
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आधुनिक प्रयोगशालाएं भी बनेंगी
सरकार ने जैविक उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना भी बनाई है।
इन प्रयोगशालाओं का निर्माण हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
प्रयोगशालाओं के माध्यम से उपज की गुणवत्ता जांच और प्रमाणन प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में पहचान मिल सकेगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक और जैविक खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण रास्ता है।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और भूजल दोनों प्रभावित होते हैं।
ऐसे में जैविक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
स्वस्थ खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग
बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के कारण लोग अब रसायन मुक्त खाद्य पदार्थों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में जैविक उत्पादों की मांग और अधिक बढ़ सकती है।
सरकार का मानना है कि यदि किसान अभी से इस दिशा में आगे बढ़ते हैं तो उन्हें भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि किसानों की आमदनी को मजबूत करना भी है।
उन्होंने कहा कि जैविक खेती किसानों को कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य दोनों उपलब्ध करा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसानों को सही बाजार, प्रमाणन और सरकारी सहायता मिलती है तो जैविक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है।
हरियाणा को जैविक खेती का केंद्र बनाने की तैयारी
सरकार की इस पहल को हरियाणा में खेती के नए मॉडल की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में हरियाणा देश के प्रमुख जैविक खेती वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियां भविष्य में खेती और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।
हरियाणा सरकार की यह नई पहल किसानों की आर्थिक मजबूती, पर्यावरण संरक्षण और लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

