नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। सत्तारूढ़ पक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि उसने लंबे समय तक नक्सली हिंसा को अप्रत्यक्ष राजनीतिक संरक्षण दिया तथा नक्सलवाद के साथ गुप्त गठजोड़ कर देश की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया।
सरकारी पक्ष का कहना है कि नक्सलवाद भारत के विकास, शांति और स्थिरता के लिए दशकों से एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सल गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद को जड़ से समाप्त कर प्रभावित क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। साथ ही स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और आधुनिक बुनियादी ढाँचा विकसित करने पर भी बल दिया जा रहा है।
राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाज़ी जारी है, जबकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद का समूल अंत तभी होगा जब विकास और विश्वास का माहौल लगातार मजबूत किया जाएगा।
कांग्रेस ने हमेशा नक्सली हिंसा को राजनीतिक संरक्षण देकर और नक्सलवाद के साथ गुप्त गठजोड़ करके देश की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर किया है।
नक्सलवाद राष्ट्र के विकास, शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है, जिसे अब समाप्त किया जा रहा है।#CongressNaxalNexus pic.twitter.com/UUvp1xTYe0
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) November 29, 2025

