हरियाणा में अनाज भंडारण को मिलेगी नई ताकत, शाहबाद-अंबाला के बीच बनेगा विशाल साइलो
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में अनाज भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने अधिकारियों को शाहबाद और अंबाला के बीच एक विशाल साइलो (वेयरहाउस) निर्माण की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों की मेहनत से तैयार अनाज को सुरक्षित रखना और भंडारण की स्थायी समस्या का समाधान करना है।
चंडीगढ़ में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अनाज भंडारण, जलापूर्ति और कृषि से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर मंथन किया। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shyam Singh Rana सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रेल और सड़क कनेक्टिविटी के साथ बनेगा आधुनिक साइलो
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित साइलो ऐसी जगह बनाया जाए जहां रेलवे लाइन और सड़क मार्ग दोनों की बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध हो। इससे कम लागत में पूरे देश में अनाज की आसान ढुलाई संभव हो सकेगी।
सरकार ने अधिकारियों को आवश्यकता अनुसार करीब 100 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि चयन और परियोजना की प्रारंभिक कार्ययोजना एक महीने के भीतर तैयार की जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक साइलो निर्माण से अनाज की बर्बादी में कमी आएगी और भंडारण क्षमता बढ़ेगी, जिससे किसानों और सरकारी एजेंसियों दोनों को फायदा होगा।
हिसार एयरपोर्ट के पास बनेगा फल-सब्जी वेयरहाउस
बैठक में मुख्यमंत्री ने हिसार एयरपोर्ट के पास बड़े वेयरहाउस या साइलो की योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। सरकार का फोकस फल और सब्जियों के सुरक्षित भंडारण पर है ताकि मिडिल ईस्ट देशों में बढ़ती मांग का लाभ हरियाणा के किसान उठा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हरियाणा की कृषि उपज की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग व्यवस्था विकसित की जाती है तो किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी और कृषि निर्यात को नई गति मिलेगी।
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नूंह और पलवल में जलापूर्ति पर भी जोर
बैठक में पलवल और नूंह क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि 108 गांवों और पुन्हाना नगर में फिलहाल ट्यूबवेल आधारित पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
जन स्वास्थ्य विभाग ने भूमिगत जलस्तर को बनाए रखने के लिए सात रैनी वेल और बूस्टिंग स्टेशन लगाने की योजना प्रस्तुत की, जिस पर लगभग 765 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नहरी पानी आधारित जलापूर्ति योजना भी तैयार की जाए, क्योंकि आने वाले समय में नूंह और पलवल क्षेत्र में औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ने की संभावना है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिलेगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने मानसून सीजन से पहले पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं और उनकी सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड तथा नियमित सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सरकार का लक्ष्य हरियाणा के हरित क्षेत्र को बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है।
किसानों और ग्रामीण विकास पर सरकार का फोकस
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शाहबाद-अंबाला साइलो परियोजना और हिसार वेयरहाउस योजना समय पर पूरी होती हैं तो हरियाणा देश के प्रमुख कृषि लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल हो सकता है।

