असीम मुनीर के पास आर्मी चीफ और CDF की दोहरी जिम्मेदारी है। जानें पाकिस्तान के नए सैन्य कमांड सिस्टम में क्या बदला और उनकी ताकत क्यों बढ़ी।
पाकिस्तान में सेना की कमान से जुड़े ढांचे में बड़ा बदलाव हुआ है। फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा प्रभावशाली हो गई है। वह पहले से ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं और अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
पाकिस्तान की संसद ने अगस्त 2026 में रक्षा और राष्ट्रीय कमांड से जुड़े नए कानूनों को मंजूरी दी। ये बदलाव 2025 में किए गए 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद तैयार की गई नई सैन्य व्यवस्था का हिस्सा हैं। इन बदलावों के बाद पाकिस्तान की सैन्य कमान का ढांचा पहले से काफी अलग हो गया है।
असीम मुनीर के पास अब कौन-कौन सी जिम्मेदारी?
असीम मुनीर इस समय पाकिस्तान के आर्मी चीफ के साथ-साथ चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज भी हैं। नई व्यवस्था में CDF को देश के सशस्त्र बलों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में केंद्रीय भूमिका दी गई है।
इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़े शीर्ष स्तर के सैन्य मामलों में CDF की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति से जुड़े मामलों में वह प्रधानमंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर भी काम करते हैं।
इसी वजह से पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ असीम मुनीर को देश के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिन रहे हैं।
27वें संविधान संशोधन से शुरू हुआ बदलाव
असीम मुनीर की बढ़ती भूमिका को अचानक हुआ बदलाव नहीं माना जा सकता। इसकी शुरुआत पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन से हुई थी।
इस संशोधन के तहत चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद खत्म कर दिया गया। इसके स्थान पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का नया पद बनाया गया।
इसके बाद असीम मुनीर को देश का पहला CDF बनाया गया। इस तरह सेना प्रमुख का पद संभालने के साथ उनके पास रक्षा बलों के व्यापक कमांड ढांचे की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी आ गई।
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कार्यकाल को लेकर भी हुआ बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था का असर केवल असीम मुनीर की शक्तियों तक सीमित नहीं है। उनके कार्यकाल को लेकर भी बदलाव किए गए हैं।
CDF के पद के लिए पांच साल का कार्यकाल निर्धारित किया गया है। नए नियमों के बाद असीम मुनीर के कार्यकाल की अवधि भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मौजूदा व्यवस्था के आधार पर उनके लंबे समय तक सैन्य नेतृत्व में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान की राजनीति में उनकी भूमिका आने वाले वर्षों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पाकिस्तान में बना नया रणनीतिक कमांड ढांचा
रक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ पाकिस्तान ने रणनीतिक सैन्य कमान को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत रणनीतिक बलों के संचालन और उनके बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य देश की रणनीतिक सैन्य क्षमताओं को एक अधिक संगठित कमांड सिस्टम के तहत संचालित करना बताया गया है। ऐसे में पाकिस्तान का सैन्य ढांचा पहले की तुलना में ज्यादा केंद्रीकृत नजर आता है।
क्या असीम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर जनरल हैं?
असीम मुनीर के पास एक साथ सेना प्रमुख और CDF की जिम्मेदारी होने के कारण उनकी स्थिति निश्चित रूप से बेहद प्रभावशाली है। यही वजह है कि कई राजनीतिक और रक्षा विश्लेषक उन्हें पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली सैन्य अधिकारियों में से एक मानते हैं।
हालांकि, यह कहना कि वह “तानाशाह” बन गए हैं, एक राजनीतिक या विश्लेषणात्मक टिप्पणी होगी। आधिकारिक तौर पर वह पाकिस्तान की संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत बनाए गए सैन्य पदों पर हैं।
पाकिस्तान के इतिहास में सेना की भूमिका
पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में सेना का प्रभाव लंबे समय से रहा है। देश में अतीत में कई बार सैन्य शासन स्थापित हुआ और अलग-अलग दौर में सेना ने राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मौजूदा बदलाव इसलिए खास है क्योंकि इस बार सैन्य कमांड में बड़ा परिवर्तन सीधे संवैधानिक संशोधन और संसद से पारित कानूनों के जरिए किया गया है। इसी वजह से आलोचक इसे पाकिस्तान में सैन्य प्रभाव के संस्थागत रूप से मजबूत होने के रूप में देखते हैं।
नागरिक सरकार और सेना के रिश्ते पर क्या असर होगा?
पाकिस्तान में नई सैन्य व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले समय में इसका नागरिक सरकार और सेना के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा।
सरकार का तर्क है कि इन बदलावों से सैन्य कमांड को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया गया है। दूसरी ओर, आलोचकों को आशंका है कि इससे सेना का राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव और बढ़ सकता है।
आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था पाकिस्तान की राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और नागरिक-सैन्य संबंधों को किस तरह प्रभावित करती है।

