दक्षिण क्षेत्रीय परिषद बैठक में अमित शाह ने जल विवाद बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया। दक्षिणी राज्यों ने परिसीमन, लोकसभा सीटों और जल बंटवारे पर चिंता जताई।
दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद, लोकसभा सीटों के परिसीमन, बुनियादी ढांचे और राज्यों के बीच सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। जल विवादों को बातचीत और आपसी समन्वय से सुलझाने के उनके सुझाव को दक्षिण भारत के राज्यों की ओर से समर्थन मिला।
हालांकि, लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता बैठक में प्रमुख मुद्दा रही। राज्यों का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने पर दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
जल विवादों के समाधान पर अमित शाह का जोर
दक्षिण क्षेत्रीय परिषद बैठक में अमित शाह ने अंतरराज्यीय नदियों और जल बंटवारे से जुड़े विवादों को जल्द हल करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राज्यों के हितों की रक्षा करना जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक विवाद जारी रहने से किसी को फायदा नहीं होता।
उन्होंने राज्यों के बीच नियमित बातचीत और संयुक्त बैठकों के माध्यम से जल संबंधी मतभेद दूर करने पर जोर दिया। शाह ने नदी जल के बेहतर प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग को भविष्य की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
नदियों को जोड़ने की दिशा में काम पर जोर
अमित शाह ने देश की प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में काम करने की बात कही।
उनके अनुसार, नदी जोड़ने की परियोजनाओं से भविष्य में जल संकट को कम करने के साथ-साथ जलमार्गों के विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता
दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। दक्षिणी राज्यों की चिंता है कि यदि भविष्य में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है।
कर्नाटक और तमिलनाडु की ओर से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग सामने आई।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1971 की जनगणना को परिसीमन के आधार के रूप में बनाए रखने की मांग भी रखी। इसके अलावा महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर लागू करने का सुझाव दिया गया।
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मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक का भरोसा
बैठक के दौरान कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना का मुद्दा भी सामने आया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के हितों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया।
उन्होंने बैठक के बाद कहा कि उनकी सरकार तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने की बात कर रही है। हालांकि, तमिलनाडु की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि बैठक में कर्नाटक के साथ चल रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद पर चर्चा नहीं हुई।
आंध्र प्रदेश ने रखा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा।
प्रस्तावित नेटवर्क में कुप्पम के रास्ते कनेक्टिविटी विकसित करने के साथ अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क पर भी जोर दिया गया।
वहीं, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्तियों तथा देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई।
केरल ने उठाया मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा
केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध से जुड़ा विषय भी बैठक में रखा गया। राज्य ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
तेलंगाना ने कृष्णा नदी के पानी पर मांगा अधिकार
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमारका ने कृष्णा नदी के जल पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की।
पुडुचेरी की ओर से उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने भी वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
क्षेत्रीय सहयोग पर रहा बैठक का फोकस
दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में जल संसाधन, परिसीमन, परिवहन, बुनियादी ढांचा और राज्यों के बीच लंबित मामलों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य दक्षिणी राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और अंतरराज्यीय मुद्दों को संवाद के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना रहा।

