अम्बाला छावनी स्थित 1857 शहीद स्मारक में 210 फुट ऊंचा तिरंगा लगाया जाएगा, जो देशभक्ति और शहीदों के सम्मान का नया प्रतीक बनेगा।
हरियाणा की ऐतिहासिक और वीरभूमि मानी जाने वाली अम्बाला छावनी जल्द ही देशभक्ति का नया प्रतीक बनने जा रही है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोए शहीद स्मारक में अब 210 फुट ऊंचा विशाल तिरंगा लहराएगा, जो न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का केंद्र बनेगा।
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी देते हुए कहा कि यह तिरंगा शहीदों के सम्मान, राष्ट्र की संप्रभुता और देशभक्ति की भावना का प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि अम्बाला में लगाया जाने वाला यह तिरंगा शहर का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज होगा और दूर-दूर तक लोगों को राष्ट्रप्रेम का संदेश देगा।
1857 की वीरगाथा को मिलेगा नया सम्मान
अम्बाला छावनी का इतिहास देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1857 में जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी भड़की थी, तब अम्बाला छावनी भी उस आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बनी थी।
इसी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए यहां भव्य शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है। अब इस स्मारक में विशाल तिरंगे की स्थापना से यह स्थान देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का और भी बड़ा केंद्र बन जाएगा।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और यह तिरंगा आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों की याद दिलाता रहेगा।
स्मारक से भी ऊंचा होगा तिरंगा
शहीद स्मारक परिसर में पहले से बना स्मारक टॉवर लगभग 206 फुट ऊंचा है, लेकिन अब लगाया जाने वाला तिरंगा उससे भी अधिक ऊंचाई पर फहराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार 210 फुट ऊंचा यह राष्ट्रीय ध्वज पूरे क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
सरकार का मानना है कि किसी भी स्मारक में राष्ट्रीय ध्वज सबसे ऊंचा होना चाहिए क्योंकि यह देश की आन, बान और शान का प्रतीक होता है। जब भी कोई पर्यटक इस स्मारक को देखेगा तो सबसे पहले उसकी नजर गर्व से लहराते तिरंगे पर पड़ेगी।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने किया निरीक्षण
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अम्बाला छावनी स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर उस स्थान का निरीक्षण किया जहां तिरंगा लगाया जाना है। उन्होंने अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कार्य को जल्द पूरा करने के लिए कहा।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विशाल तिरंगे की स्थापना का कार्य विशेष तकनीकी टीम की देखरेख में किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक संरचनात्मक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
देशभर के पर्यटकों के लिए बनेगा आकर्षण
सरकार का मानना है कि शहीद स्मारक और विशाल तिरंगा आने वाले समय में देशभर के लोगों को आकर्षित करेगा। जिस प्रकार कुरुक्षेत्र और अन्य ऐतिहासिक स्थल राष्ट्रीय पहचान बन चुके हैं, उसी तरह अम्बाला का यह स्मारक भी देशभक्ति पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्मारक नई पीढ़ी को देश के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जोड़ने का काम करते हैं।
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लगभग सात सौ करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ स्मारक
अम्बाला छावनी में बने इस विशाल शहीद स्मारक का निर्माण बड़े स्तर पर किया गया है। जीटी मार्ग पर लगभग बाइस एकड़ भूमि में फैले इस स्मारक को तैयार करने में करीब सात सौ करोड़ रुपये की लागत आई है।
स्मारक में 1857 के उन वीरों को श्रद्धांजलि दी जाएगी जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सरकार का कहना है कि यह स्मारक केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का केंद्र बनेगा।
अम्बाला छावनी में राष्ट्रनायकों को लगातार मिल रहा सम्मान
ऊर्जा मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अम्बाला छावनी में कई ऐतिहासिक और राष्ट्रभक्ति से जुड़े स्मारकों का निर्माण और विकास किया गया है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देने के लिए सुभाष पार्क में उनकी विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा भी यहां स्थापित की गई है जहां लोग श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचते हैं।
सरकार अब सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारी भी कर रही है। इसके अलावा वीर महाराणा प्रताप और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमाओं को भी प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है।
युवाओं में जागेगी देशभक्ति की भावना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के स्मारक युवाओं में राष्ट्रभक्ति और देश सेवा की भावना को मजबूत करते हैं। आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ना बेहद जरूरी है और ऐसे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि जब युवा अपने शहर में इतने भव्य राष्ट्रभक्ति स्मारकों को देखेंगे तो उनमें देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना और मजबूत होगी।
अम्बाला को मिलेगी नई पहचान
210 फुट ऊंचे तिरंगे की स्थापना के बाद अम्बाला छावनी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती है बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को भी नई दिशा दे सकती है।
स्थानीय लोगों में भी इस परियोजना को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि यह तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं बल्कि देश के वीरों के सम्मान और भारत की एकता का प्रतीक होगा।
राष्ट्रभक्ति का स्थायी प्रतीक बनेगा स्मारक
सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह स्मारक राष्ट्रभक्ति, इतिहास और संस्कृति का ऐसा केंद्र बनेगा जहां देशभर से लोग प्रेरणा लेने आएंगे। विशाल तिरंगे के साथ अम्बाला का शहीद स्मारक देश के उन वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि देगा जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

