यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में पेट्रोल सप्लाई प्रभावित, भारत से बढ़ा ईंधन आयात। जानें 10 लाख बैरल पेट्रोल और पूरा मामला।
रूस दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल उत्पादक और रिफाइनिंग देशों में शामिल है, लेकिन यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के कारण उसकी रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर अब घरेलू पेट्रोल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। स्थिति को संभालने के लिए रूस ने भारत से भी पेट्रोल मंगाना शुरू कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और अब उसी कच्चे तेल से तैयार पेट्रोल का कुछ हिस्सा वापस रूस भेजे जाने की स्थिति बन रही है। इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार का बदला हुआ स्वरूप सामने आया है।
भारत से रूस को बढ़ा पेट्रोल निर्यात
रूस को पेट्रोल की सबसे बड़ी आपूर्ति फिलहाल पड़ोसी देशों बेलारूस और कजाखस्तान से होती है। हालांकि, जून और जुलाई 2026 में भारत से भी रूस को पेट्रोल की अच्छी मात्रा भेजी गई।
शिपमेंट से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत से रूस को लगभग 12,000 बैरल प्रतिदिन पेट्रोल भेजा गया। जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 21,000 बैरल प्रतिदिन हो गया। दोनों महीनों को मिलाकर लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल रूस पहुंचा।
जानकारों का मानना है कि वास्तविक मात्रा इससे कुछ अधिक भी हो सकती है, क्योंकि कुछ शिपमेंट शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए पहुंचने की संभावना है। वहीं कुछ जहाजों में अंतिम गंतव्य की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
नायरा एनर्जी बनी प्रमुख भारतीय सप्लायर
व्यापार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत से रूस को पेट्रोल भेजने वाली प्रमुख कंपनियों में नायरा एनर्जी शामिल है। गुजरात के वडीनार स्थित इसकी रिफाइनरी से पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया जाता है।
नायरा एनर्जी की खास बात यह है कि इसमें रूसी हिस्सेदारी भी है। कंपनी की रिफाइनरी रूस से आने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करती है।
इस वजह से भारत-रूस ऊर्जा कारोबार में एक दिलचस्प स्थिति बनती है। रूस से कच्चा तेल भारत आता है, भारतीय रिफाइनरी उसे प्रोसेस करती है और उससे तैयार कुछ पेट्रोलियम उत्पाद फिर रूस भेजे जाते हैं।
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भारत-रूस के ऊर्जा संबंधों में आया बड़ा बदलाव
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के ऊर्जा कारोबार में महत्वपूर्ण बदलाव आया। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस के पारंपरिक यूरोपीय बाजार प्रभावित हुए।
इसके बाद रूस ने एशियाई खरीदारों को आकर्षक कीमतों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया। भारत और चीन रूसी क्रूड के बड़े खरीदार बनकर सामने आए।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वर्तमान में रूस से आने वाला क्रूड भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। अब पेट्रोल के निर्यात के रूप में ऊर्जा संबंधों का एक नया पहलू सामने आया है।
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रिफाइनरियों पर दबाव
रूस में पेट्रोल की उपलब्धता प्रभावित होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी रिफाइनिंग व्यवस्था पर बढ़ता दबाव है। यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए जा रहे ड्रोन हमलों से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा रिफाइनरियों का निर्धारित रखरखाव, गर्मियों में ईंधन की बढ़ी मांग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परेशानियों ने भी पेट्रोल की उपलब्धता को प्रभावित किया है। इन परिस्थितियों में रूस ने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
डीजल की स्थिति पेट्रोल से बेहतर
रूस में पेट्रोल की तुलना में डीजल की स्थिति फिलहाल कुछ बेहतर बताई जा रही है। इसका एक कारण यह है कि रूसी रिफाइनिंग क्षमता घरेलू जरूरतों की तुलना में बड़ी मात्रा में डीजल उत्पादन के अनुरूप विकसित की गई है। फिर भी सर्दियों से पहले घरेलू भंडार को मजबूत रखने के लिए रूस ने डीजल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।
पेट्रोल निर्यात पर रूस की मजबूरी
रूस के लिए मौजूदा हालात में पेट्रोल का निर्यात करना मुश्किल हो गया है। घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले ईंधन की मात्रा सीमित किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इससे पता चलता है कि रिफाइनिंग क्षमता में कमी का असर सीधे खुदरा बाजार तक पहुंच रहा है।
पेट्रोल बाजार क्यों ज्यादा संवेदनशील है?
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर के विशेषज्ञ सुमित रितोलिया के मुताबिक, रूस में पेट्रोल की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है। सामान्य परिस्थितियों में रूसी रिफाइनरियों का उत्पादन घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहता है और इसके बाद सीमित मात्रा में पेट्रोल निर्यात किया जाता है।
ऐसे में यदि रिफाइनरियों का उत्पादन कुछ समय के लिए भी कम हो जाता है, तो घरेलू बाजार में अतिरिक्त स्टॉक तेजी से घट सकता है। यही वजह है कि रूस को मौजूदा परिस्थितियों में दूसरे देशों से पेट्रोल मंगाने की जरूरत पड़ रही है।
भारत से अगस्त में भी जारी रह सकती है सप्लाई
व्यापार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अगस्त में भी भारत से रूस को पेट्रोल की आपूर्ति जारी रहने की संभावना है। हालांकि, अगस्त के पूरे आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
अगर भारत से पेट्रोल निर्यात की यह रफ्तार आगे भी बनी रहती है, तो यह दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के बदलते स्वरूप को दर्शाएगा। भारत जहां रूसी क्रूड का बड़ा खरीदार बना हुआ है, वहीं रूस को तैयार पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराने में भी भारतीय रिफाइनरियों की भूमिका बढ़ सकती है।

