पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पेपर लीक को गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के भविष्य पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर गंभीर सवाल उठाए।
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस विषय पर केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों को निशाने पर लेते हुए कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा की अनियमितता नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और आम परिवारों की उम्मीदों पर सीधा हमला है।
गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों का भविष्य दांव पर
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए निंदा प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं। लेकिन जब परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कथित तौर पर पैसे के दम पर खरीदे जाते हैं, तो मेहनती विद्यार्थियों के सपने टूट जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि प्रश्नपत्रों की खरीद-फरोख्त का संगठित नेटवर्क है, जो योग्य छात्रों के साथ अन्याय करता है।
18 से 20 लाख रुपये में बिकते हैं प्रश्नपत्र: मान
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पेपर लीक और नकल कराने वाले गिरोह कथित रूप से परीक्षा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए 18 से 20 लाख रुपये तक वसूलते हैं। उन्होंने कहा कि हालिया गिरफ्तारियां इस पूरे नेटवर्क के बड़े स्तर पर सक्रिय होने की ओर संकेत करती हैं।
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केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर उठाए सवाल
भगवंत मान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शुरुआत में पेपर लीक की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और छात्रों के बढ़ते विरोध के बाद ही कार्रवाई की बात कही।
उन्होंने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक अदालतें बनाना पर्याप्त नहीं है। सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और लीक की घटनाओं को रोकना होनी चाहिए।
भाजपा शासित राज्यों पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच देशभर में 65 पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जिनमें अधिकांश मामले भाजपा शासित राज्यों से जुड़े थे। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद से ऐसी घटनाओं की संख्या 90 से अधिक हो चुकी है।
उनके अनुसार, यह केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं बल्कि लाखों युवाओं के विश्वास और भविष्य के साथ गंभीर धोखा है।
छात्र आंदोलनों का किया समर्थन
मुख्यमंत्री ने पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह उचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
मान ने यह भी कहा कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा है, जिसका गंभीर सामाजिक प्रभाव देखने को मिला है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से उनके साथ खड़ा नहीं दिखा। उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की उपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की।
पंजाब में सामने आए मामलों पर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि पंजाब में भी नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा और फार्मेसी परीक्षा से जुड़े अनियमितता के मामले सामने आए थे। हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दोनों मामलों में तत्काल कार्रवाई की और डिजिटल निगरानी प्रणाली के जरिए फार्मेसी परीक्षा में हुई गड़बड़ी का कुछ ही मिनटों में पता लगा लिया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है और अब तक 68 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से दी जा चुकी हैं।

