मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया। KGMU में घायलों से मिले और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हुई दुखद अग्नि दुर्घटना के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से हादसे की पूरी जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) पहुंचे, जहां उन्होंने हादसे में घायल लोगों और उनके परिवारजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के इलाज और स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी जानकारी ली।
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घायलों के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में घायलों का उपचार पूरी गंभीरता और प्राथमिकता के साथ किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और पीड़ितों की हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लखनऊ में अग्नि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पहुंचकर इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना व चिकित्सकों से घायलों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
सभी घायलों का समुचित उपचार… pic.twitter.com/cC9xhFasaV
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 22, 2026
पीड़ित परिवारों के प्रति जताई संवेदना
योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि अपनों को खोने वाले परिवारों की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस कठिन समय में सभी प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत, उपचार और सहायता से जुड़े सभी कार्यों को संवेदनशीलता और तेजी के साथ पूरा किया जाए।

