NEET, CUET, SSC और UPSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग की है।
AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने NEET, CUET, SSC और UPSC जैसी प्रमुख परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों, पेपर लीक और तकनीकी समस्याओं पर चिंता जताते हुए पारदर्शी और मजबूत परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भारत में हर साल लाखों छात्र NEET, CUET, SSC और UPSC जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर अपने भविष्य का मार्ग तय करते हैं। NEET में 24 लाख से अधिक उम्मीदवार, CUET में 13 लाख से ज्यादा छात्र और अन्य सरकारी परीक्षाओं में भी बड़ी संख्या में युवा भाग लेते हैं।
लेकिन हाल के वर्षों में इन परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक, तकनीकी खामियों और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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हरपाल सिंह चीमा की प्रतिक्रिया और मांग
AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय के समान है। उनके अनुसार, जिन परीक्षाओं पर करोड़ों युवाओं का भविष्य निर्भर करता है, उन्हें पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
NEET ਵਿੱਚ 24 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ, CUET ਵਿੱਚ 13 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਅਤੇ SSC ਤੇ UPSC ਵਰਗੀਆਂ ਪ੍ਰੀਖਿਆਵਾਂ ਵਿੱਚ ਹਰ ਸਾਲ ਲੱਖਾਂ ਨੌਜਵਾਨ ਆਪਣੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਦੀ ਬਾਜ਼ੀ ਲਗਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਪਰ ਜਦੋਂ ਪ੍ਰੀਖਿਆਵਾਂ ਹੀ ਵਿਵਾਦਾਂ, ਤਕਨੀਕੀ ਖ਼ਾਮੀਆਂ ਅਤੇ ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਦੇ ਦੋਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਘਿਰ ਜਾਣ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਨੁਕਸਾਨ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਦੇ ਭਰੋਸੇ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।… https://t.co/KsMK6kpt29
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) June 1, 2026
छात्रों और परिवारों पर प्रभाव
इन परीक्षा विवादों का सबसे बड़ा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है। छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और मानसिक तनाव झेलते हैं, जबकि माता-पिता आर्थिक और भावनात्मक रूप से बड़ा निवेश करते हैं। जब परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ सामने आती हैं, तो इससे छात्रों का भरोसा टूटता है और उनका भविष्य अनिश्चितता में पड़ जाता है।
मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता
विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाना चाहिए। साथ ही, पेपर लीक रोकने और निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की जरूरत है। इस पूरी व्यवस्था को राजनीति से दूर रखकर केवल छात्रों के हित में संचालित करना समय की आवश्यकता है।

