पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा ने ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी, मामले में भाजपा और ‘आप’ के बीच सियासी तनाव बढ़ा।
पंजाब की राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री संजीव अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि जिस प्रकार पहले भाजपा नेताओं और सांसदों को सुरक्षा और राहत दी गई थी, उसी प्रकार उन्हें भी न्यायिक संरक्षण दिया जाए।
यह मामला उस समय और अधिक चर्चाओं में आ गया जब संजीव अरोड़ा की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने दावा किया कि ईडी की पूरी कार्रवाई केवल राजनीतिक दबाव बनाने और विरोधी नेताओं को निशाना बनाने के उद्देश्य से की गई है। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और पंजाब की मौजूदा सियासत पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए।
हाईकोर्ट में जोरदार बहस, राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
मामले की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान संजीव अरोड़ा के वकील ने अदालत में कहा कि पंजाब इस समय राजनीतिक बदले की राजनीति का केंद्र बन चुका है। उन्होंने दलील दी कि सत्ता और एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
वकील ने अदालत को बताया कि हाल के महीनों में कुछ भाजपा नेताओं और सांसदों को सुरक्षा प्रदान की गई थी क्योंकि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का खतरा था। अब वही परिस्थितियां संजीव अरोड़ा के मामले में भी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने अदालत से समानता के अधिकार के तहत समान राहत देने की मांग की।
सुनवाई के दौरान अदालत में यह भी कहा गया कि यदि किसी मामले में राजनीतिक पक्षपात की आशंका हो तो न्यायालय का दायित्व बनता है कि वह निष्पक्षता सुनिश्चित करे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई अगले दिन के लिए निर्धारित कर दी।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा उल्लंघन के लगाए आरोप
ईडी ने संजीव अरोड़ा को एक रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े कथित आर्थिक अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने निर्यात संबंधी दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां कीं और विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, बिना वास्तविक माल की आवाजाही के निर्यात दिखाकर आर्थिक लेनदेन किए गए। ईडी का दावा है कि यह पूरा मामला वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध कारोबार से जुड़ा हुआ है।
हालांकि संजीव अरोड़ा की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया। अदालत में कहा गया कि सभी भुगतान बैंकिंग माध्यमों से हुए और हर निर्यात कानूनी प्रक्रिया तथा सीमा शुल्क अनुमति के बाद किया गया था। बचाव पक्ष ने कहा कि किसी अन्य व्यापारी या विक्रेता की गलती का जिम्मेदार सीधे तौर पर संजीव अरोड़ा को नहीं ठहराया जा सकता।
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गिरफ्तारी प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
संजीव अरोड़ा की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी। उनके वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी सुबह कर ली गई जबकि गिरफ्तारी के आधार कई घंटे बाद बताए गए। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया।
बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी की प्रति समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत को बताया गया कि प्राथमिकी देर रात दर्ज की गई और आरोपी पक्ष को उचित जानकारी तक नहीं दी गई। वकील ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
प्राथमिकी और ईसीआईआर की वैधता पर सवाल
संजीव अरोड़ा के वकील ने अदालत में प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट की वैधता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब मूल प्राथमिकी ही कानूनी विवादों से घिरी हुई है तो उसके आधार पर दर्ज ईसीआईआर भी टिकाऊ नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस पुलिस जांच के सीधे मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कार्रवाई शुरू कर देना गंभीर कानूनी त्रुटि है। अदालत में कहा गया कि यह जल्दबाजी राजनीतिक दबाव का संकेत देती है।
भाजपा में शामिल नेताओं का भी अदालत में हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान हाल ही में भाजपा में शामिल हुए कुछ नेताओं का भी उल्लेख किया गया। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर पहले जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई, उनके भाजपा में शामिल होने के बाद कार्रवाई धीमी पड़ गई या समाप्त हो गई।
वकील ने दावा किया कि यही कारण है कि संजीव अरोड़ा के खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पंजाब की राजनीति में बढ़ सकता है टकराव
इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है। आम आदमी पार्टी लगातार यह आरोप लगा रही है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया जा रहा है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी छूट नहीं मिलनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। यदि अदालत से संजीव अरोड़ा को राहत मिलती है तो इसे आम आदमी पार्टी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकती है। दूसरी ओर यदि ईडी की कार्रवाई को अदालत से समर्थन मिलता है तो विपक्ष के लिए यह बड़ा झटका होगा।
अगली सुनवाई पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल पूरे मामले पर पंजाब की राजनीतिक पार्टियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता की नजर बनी हुई है। हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय कर सकती है। अदालत का फैसला न केवल संजीव अरोड़ा के राजनीतिक भविष्य बल्कि पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

