जेसी बोस विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का भव्य आयोजन, इलेक्ट्रिक वाहन और सतत ऊर्जा पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
चंडीगढ़: J. C. Bose University of Science and Technology में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर “इलेक्ट्रिक वाहन एवं सतत ऊर्जा” विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बदलती तकनीक, ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और भविष्य की परिवहन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस वर्ष राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की थीम “इलेक्ट्रिक वाहन एवं सतत ऊर्जा” रखी गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को हरित ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणालियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का बड़ा माध्यम बनेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर राजकुमार द्वारा की गई। उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक आज समाज की बड़ी चुनौतियों के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकी समाधान बेहद जरूरी हैं।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु Rajeev Kumar ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक का असली उद्देश्य मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और बेहतर बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी तकनीकी शिक्षा और नवाचार क्षमता का उपयोग केवल रोजगार तक सीमित न रखें बल्कि समाज और देश की समस्याओं के समाधान के लिए भी करें।
कुलगुरु ने विश्वविद्यालय में विकसित की जा रही नई परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित एक अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं बल्कि उन्हें व्यावहारिक और उद्योग आधारित तकनीकी अनुभव प्रदान करना भी है।
also read : हरियाणा के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने की बड़ी पहल, ड्रोन और रॉकेट तकनीक का मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया सतत ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में युवाओं को आधुनिक तकनीकों के प्रति तैयार करना बेहद आवश्यक है ताकि वे वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकें।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र Kapil Singhal ने इलेक्ट्रिक वाहनों में रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग तकनीक की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और फेज चेंज मटेरियल जैसी तकनीकें इलेक्ट्रिक बसों, यात्री वाहनों और कोल्ड चेन परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों में ऊर्जा संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती है और इसी कारण नई तकनीकों पर लगातार शोध किया जा रहा है। आधुनिक शीतलन प्रणालियां बैटरी की कार्यक्षमता बढ़ाने, ऊर्जा की बचत करने और वाहन की दूरी क्षमता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, स्टार्टअप और नवाचार आधारित परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी तकनीकी प्रदर्शनी, शोध परियोजनाओं और नवाचार आधारित मॉडलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कई विद्यार्थियों ने ऊर्जा संरक्षण, बैटरी तकनीक, स्मार्ट चार्जिंग प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल परिवहन से जुड़े मॉडल प्रस्तुत किए।
तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा कि सतत ऊर्जा आधारित तकनीकों को अपनाना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता और प्रदूषण के कारण दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और वैज्ञानिकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उन्हें नवाचार और अनुसंधान का मजबूत केंद्र बनना होगा। इसके लिए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए और अधिक तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान कार्यशालाएं और नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी ताकि युवा नई तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान क्षमता और नवाचार की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से तकनीकी अनुसंधान, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।

