हरियाणा में महिला आरक्षण और परिसीमन के बाद लोकसभा व विधानसभा सीटें बढ़ेंगी, गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़ा राजनीतिक बदलाव संभव।
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण और आगामी परिसीमन प्रक्रिया का असर अब राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है। हरियाणा भी इस बड़े बदलाव से अछूता नहीं रहेगा। हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन लागू होने के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है, जहां सीटों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ शक्ति संतुलन भी नए सिरे से तय होगा।
सूत्रों और अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, परिसीमन के बाद हरियाणा में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 10 से बढ़कर 15 तक पहुंच सकती है। इन सीटों में लगभग एक-तिहाई यानी 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं, विधानसभा की बात करें तो वर्तमान 90 सीटों की संख्या बढ़कर करीब 119 या 120 हो सकती है, जिनमें लगभग 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहने की संभावना है। यह बदलाव राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से हरियाणा की पारंपरिक राजनीति, जो अब तक ग्रामीण क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है, अब तेजी से शहरी क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो सकती है। खासकर Gurugram और Faridabad जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर इस बदलाव के केंद्र में रहेंगे। इन क्षेत्रों की बढ़ती आबादी और शहरीकरण के चलते यहां विधानसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
फरीदाबाद, जिसकी आबादी 18 लाख से अधिक मानी जा रही है, और गुरुग्राम, जो आईटी और कॉर्पोरेट हब के रूप में उभरा है, अब राजनीतिक रूप से भी अधिक प्रभावशाली बन सकते हैं। इसके अलावा सोनीपत और करनाल जैसे जिलों में भी नए विधानसभा क्षेत्रों के सृजन की संभावना जताई जा रही है।
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इस बदलाव का सीधा असर राजनीतिक दलों की रणनीतियों पर भी पड़ेगा। जहां पहले ग्रामीण वोट बैंक चुनावी समीकरण तय करते थे, वहीं अब शहरी मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इससे क्षेत्रीय दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जबकि राष्ट्रीय दलों को नए शहरी मुद्दों पर फोकस करना होगा।
सीटों की संख्या में संभावित बढ़ोतरी के साथ ही राज्य के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी हो गई है—नए विधानसभा भवन की आवश्यकता। वर्तमान विधानसभा परिसर में सीमित जगह के कारण बढ़ी हुई संख्या के विधायकों, अधिकारियों और मीडिया को समायोजित करना मुश्किल होगा। ऐसे में 2029 से पहले एक आधुनिक और विस्तृत विधानसभा भवन का निर्माण जरूरी माना जा रहा है।
हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। इससे न केवल महिलाओं को सशक्त प्रतिनिधित्व मिलेगा, बल्कि राजनीतिक व्यवस्था अधिक समावेशी और संतुलित भी बनेगी। आने वाले वर्षों में यह बदलाव हरियाणा की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को नई परिभाषा दे सकता है।

