हरियाणा सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री 2027 के लिए नामांकन आमंत्रित किए, 31 जुलाई अंतिम तिथि तय।
देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों के लिए हरियाणा सरकार ने नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। हरियाणा सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री 2027 के लिए योग्य व्यक्तियों के नाम आमंत्रित किए हैं। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हर वर्ष की तरह गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2027 को की जाएगी। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अधिक से अधिक योग्य व्यक्तियों की पहचान कर उनकी सिफारिश समय पर भेजी जाए।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पद्म पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुकी है और इसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। साथ ही राज्य स्तर पर सिफारिशें भेजने की समय-सीमा 10 जून 2026 तय की गई है। सभी नामांकन केवल आधिकारिक पोर्टल National Awards Portal के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे, इसलिए निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी भरना अनिवार्य होगा। समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
पद्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी और इन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के रूप में जाना जाता है। ये पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों जैसे कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, सामाजिक कार्य, लोक सेवा, व्यापार और उद्योग आदि में उत्कृष्ट और विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों का मुख्य उद्देश्य समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना और दूसरों को प्रेरित करना है।
सरकार ने इस बार विशेष रूप से उन प्रतिभाओं को सामने लाने पर जोर दिया है, जो अक्सर प्रचार-प्रसार से दूर रहते हैं लेकिन अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं। ऐसे लोगों की पहचान के लिए विभागों को सक्रिय रूप से प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर विशेष सर्च कमेटी का गठन भी किया जा सकता है, जो योग्य उम्मीदवारों का चयन कर सिफारिशें तैयार करेगी।
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चयन प्रक्रिया में ‘एक्सीलेंस प्लस’ का सिद्धांत अपनाया जाएगा, यानी केवल वही व्यक्ति चुने जाएंगे जिन्होंने अपने जीवन में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हों और जिनके कार्यों में जनसेवा का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता हो। साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन और समाज के अन्य कमजोर वर्गों से आने वाले योग्य व्यक्तियों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले।
नियमों के अनुसार, आमतौर पर पद्म पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिए जाते, लेकिन विशेष परिस्थितियों में यदि किसी योग्य व्यक्ति का निधन हाल ही में हुआ हो तो उसे भी सम्मानित किया जा सकता है। इसके अलावा, जिन व्यक्तियों को पहले कोई बड़ा पुरस्कार मिल चुका है, उन्हें पद्म पुरस्कार के लिए तभी विचार किया जाएगा जब उस सम्मान के बाद कम से कम पांच वर्ष का अंतराल हो, हालांकि विशेष मामलों में इसमें छूट भी दी जा सकती है।
सरकारी कर्मचारियों की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी कर्मचारी और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत लोग आमतौर पर इन पुरस्कारों के लिए पात्र नहीं होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पारदर्शी और व्यापक नामांकन प्रक्रिया से देशभर की छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी और पद्म पुरस्कारों की प्रतिष्ठा और अधिक मजबूत होगी। हरियाणा सरकार की यह पहल न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकती है, क्योंकि इससे समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को उचित मंच और सम्मान मिलेगा।

