हरियाणा में रबी खरीद 2026-27 के तहत 39.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक, 10.92 लाख मीट्रिक टन खरीद और किसानों को 188 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान।
हरियाणा में रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत फसलों की खरीद प्रक्रिया तेज गति से जारी है और राज्य की मंडियों में गेहूं और सरसों की आवक लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश की विभिन्न मंडियों और खरीद केंद्रों में लगभग 39.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है। इस दौरान लगभग 2.44 लाख किसानों का 30.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन भी पूरा किया जा चुका है, जिससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा अब तक 10.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है और करीब 188 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जा चुकी है। यह भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से किया गया है, जिससे किसानों को समय पर और बिना किसी बिचौलिये के भुगतान मिल रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में हरियाणा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन तथा भारतीय खाद्य निगम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रबी खरीद सीजन के तहत सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू हो चुकी है, जबकि गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से जारी है। केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों का MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्यभर में व्यापक स्तर पर खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। सरसों की खरीद के लिए 112 मंडियां खोली गई हैं, जबकि गेहूं के लिए 416 मंडियों के साथ 264 अतिरिक्त खरीद केंद्र भी बनाए गए हैं।
राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार लागू किए हैं। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैनिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए राज्यभर में 1281 बायोमेट्रिक मशीनें और 407 आईरिस स्कैनिंग डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल वास्तविक किसान ही अपनी फसल बेच सकें।
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इसके अतिरिक्त, मंडियों में वाहनों के पंजीकरण नंबर दर्ज किए जा रहे हैं, जियो-फेंसिंग लागू की गई है और निगरानी के लिए लगभग 932 कैमरे लगाए गए हैं। इन उपायों से न केवल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर भी तुरंत नजर रखी जा सकती है। इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए लगभग 2500 कर्मचारियों और 114 तकनीकी स्टाफ को तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का दावा है कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खरीद प्रक्रिया अधिक संगठित और डिजिटल रूप से मजबूत नजर आ रही है।
पिछले वर्ष 12 अप्रैल तक जहां 20.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में कृषि उत्पादन और खरीद व्यवस्था दोनों में सुधार हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा सरकार की यह पहल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगी और कृषि क्षेत्र में विश्वास को और मजबूत करेगी।

